रिपोर्ट : देवानंद नायक @9713989417
भिण्ड : यूं तो मप्र की सियासत में आशुतोष तिवारी का नाम किसी परिचय का मोहताज नहीं है उनकी संगठन झमता और रणनीतिक कौशल का लाभ भाजपा हमेशा उठाती रही है दूसरी तरफ लहार विधानसभा सीट का राजनीतिक महत्त्व किसी से छुपा नहीं है बात करें लहार तीन चार दशक की तो यहाँ भाजपा की स्तिथि कई दफा मजबूत तो रही है किंतु कई बार वेहद निरीह हालत में भाजपा के जीवन यात्रा में केवल भाजपा के सिम्बल पर भाजपा लहार विधानसभा सीट पर केवल एक बार चुनाव जीती है सन 1985 में भाजपा के कद्दावर नेता मथुरा प्रसाद महंत के सिर पर जीत का सेहरा सजा था उसके बाद 1998 तक मथुरा महंत भाजपा के सेनापति के रूप में रणभूमि में डटे रहे और कड़े मुकाबले के साथ चुनाव हारते रहे 2000 का दशक आते - आते राजनीतिक परिदृश्य में बदलाव हुआ 2003 का चुनाव में मथुरा महंत चुनावी मैदान में नही थे बसपा के टिकट पर पूर्व मंत्री रमाशंकर सिंह तथा भाजपा के टिकट पर छात्र राजनीति से उभरे युवा नेता अम्बरीष शर्मा उर्फ गुड्डू भैया मैदान में थे 2008 में मुन्नी देवी त्रिपाठी मैदान थी किंतु भाजपा की हालत निराशाजनक ही रही 2013 व 2018 में रौन विधानसभा क्षेत्र के पूर्व विधायक रसाल सिंह को भाजपा के टिकट उतारा गया किंतु परिणाम आशानुरूप नही रहे हालांकि वोट प्रतिशत में इजाफा हुआ था तमाम राजनैतिक प्रयोगों के बाद भी यह क्षेत्र कांग्रेस के खाते में जाता रहा ,राजनीतिक दृष्टि से विश्लेषण करने पर यह बात स्पष्ट थी कि यह क्षेत्र कांग्रेस का गढ़ नही था बल्कि ऐसा तो केबल प्रचारित किया जाता रहा है बल्कि सत्यता तो यह कि यहाँ भाजपा में बड़ी गुटवाजी एक कारण थी लेकिन सबसे अहम कारण यह था कि 2003 से प्रदेश की सत्ता में आरूढ़ भाजपा ने यहाँ के स्थानीय कार्यकर्ता को कभी सत्ता पार्टी के कार्यकर्ता होने का अहसास नही करा पाया लहार विधानसभा क्षेत्र में प्रशासन पर लगातार कांग्रेस हावी रही और भाजपाई केवल निरीह नजर आते रहे हैं दिग्विजयसिंह के कार्यकाल में भर्ती हुए शिक्षा विभाग के संविदा शिक्षक व शिक्षाकर्मियों का बड़ा समूह एक पार्टी के प्रति निष्ठावान बन कर कार्य करते रहे है पुरुस्कार स्वरूप स्कूलों के प्रधानाचार्य पत्नियों के नाम फर्म बना कर ठेकेदारी कर रहे हैं यही स्तिथि आंगनवाड़ी कार्यकर्ता ,बीएलओ , मनरेगा कर्मियों की भी है दशकों से जमे ऐसे कई कर्मचारी है जो यह भी भूल गए कि वह मप्र शासन के कर्मचारी है या नेता विशेष के
अगर इस बारे में बात करने पर आये तो फेहरिस्त बहुत लंबी है लेकिन मुख्य बात यह है कि भाजपा के पूर्व संगठन मंत्री व वर्तमान में कैबिनेट मंत्री दर्जा प्राप्त और आकांक्षी विधानसभा लहार के प्रभारी आशुतोष तिवारी के कुशल नेतृत्व व संगठन और रणनीतिक कौशल के चलते न सिर्फ भाजपाई संगठित हुए बल्कि नई ऊर्जा के साथ सक्रिय रूप से जनमानस के मध्य शासन की योजना व संगठन का कार्य लेकर जाने लगे
हाल ही में नगर के एक व्यापारी के घर को अवैध तरीके से राजनैतिक इशारों पर क्षतिग्रस्त कर दिया गया (यदि भाजपा नेता अम्बरीष शर्मा न पहुंचते तो तोड़ दिया गया था) इस मामले में संगठित होकर भाजपा ने न सिर्फ नगरपालिका प्रशासन के खिलाफ लड़ाई लड़ी बल्कि उस व्यापारी को न्याय दिलाने का कार्य किया लहार में पहली बार बड़े स्तर कार्यवाही देखने को मिली जिसमे मैदानी स्तर पर लहार के सभी भाजपा नेताओं व कार्यकर्ताओं ने अपने स्तर पर सबने मिलकर महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई तो सरकार व संगठन के बीच सेतु का कार्य प्रभारी नेता आशुतोष तिवारी द्वारा किया गया यह उनके ही करिश्माई संगठन कौशल का कमाल है कि लहार में मृतप्राय पड़ी भाजपा पुनः न सिर्फ जीवंत हुई बल्कि अपनी ताकत को पहचान कर कार्यकर्ताओं व जनता के अधिकार की लड़ाई लड़ रही है

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