*भाजपा के लिये "अनलकी" रही लहार सीट पर 2023 में होगा कोई चमत्कार*
📝 देवानंद नायक
"मिरे जुनूँ का नतीजा ज़रूर निकलेगा
इसी सियाह समुंदर से नूर निकलेगा"
ये पंक्तियाँ उनकी नजर है जिन्हें तीन दशक से लहार में सियासी परिवर्तन की आस हैं इन्ही परिवर्तन चाहने वालों की अगुवाई करने वाले नामो में एक नाम आता है छात्र संघ की राजनीति से सक्रिय सियासत में दशकों से सक्रिय रहने वाले उस युवा नेता का जो दशकों से संघर्ष का माद्दा रखता है किंतु सियासी तकदीर बदलने का अभी भी इंतजार है हम बात कर रहे हाल ही में भारतीय जनता पार्टी में घर बापसी करने वाले भाजपा के पूर्व जिला महामंत्री व बसपा के टिकट पर 2018 का चुनाव लड़ मुकाबले को त्रिकोणीय बनाने बाले अम्बरीष शर्मा की जिन्हें क्षेत्रीय सियासत में गुड्डू भैया के नाम से जाना जाता है
उमा भारती की मार्फ़त वर्ष 2003 में भाजपा का टिकट पा कर सक्रिय भाजपाई राजनीति में उतरने वाले अम्बरीष को उस समय बदनसीबी का सामना करने पड़ा 2003 के चुनाव में युवा अम्बरीष को लगभग 8600 वोटो न सिर्फ सन्तुष्टि करनी पड़ी बल्कि जमानत भी गवानी पड़ी इस बात का राजनीतिक फायदा उनके नजदीकी प्रतिद्वंदियों ने खूब उठाया और अम्बरीष को 2008 व 2013 और 2018 में टिकट से न सिर्फ दूर रखा गया बल्कि राजनीतिक उपेक्षा का भी शिकार होना पड़ा किन्तु समर्थकों की राय पर 2018 में बगावत कर बसपा के टिकट पर चुनाव लड़ने के फैसले ने अम्बरीष के राजनीतिक ग्रहण को दूर कर दिया इकतीस हजार से अधिक मत पाकर अपने राजनीतिक कद में इजाफा कर प्रतिद्वंद्वीयो के सामने एक बड़ी लकीर खींच दी किन्तु बसपा की राजनीति ज्यादा दिनों तक रास नही आई फिर भी भाजपा में वापसी को लेकर तमाम राजनीतिक कुचक्रों का सामना करते हुए भाजपा प्रदेशाध्यक्ष बीड़ी शर्मा के सामने न सिर्फ घर वापसी हुई बल्कि टीम बीड़ी में स्थान प्राप्त कर बडी राजनीतिक छलांग लगा दी
अम्बरीष के बढ़ते राजनीतिक कद से लहार की सियासी बयार में बदलाव देखने को तो मिलेगा ही किंतु लहार में राजनीतिक परिवर्तन की आस लेकर कार्य करने वाले सियासतदानों को बंद कमरों से बाहर निकल कर गांव गली की धूल खानी पड़ेगी , विधानसभा क्षेत्र के चारो कोनों की सियासत अलग है जमीनी स्तर पर जा कर हर क्षेत्र की अलग रणनीति तैयार कर सकने की क्षमताओं को विकसित करने के साथ सबसे बड़ा कार्य जातिगत आंकड़ो से की जाने बाली सामाजिक बाजीगरी को समझने व आंकड़ों की बाजीगरी के चक्रव्यूह को भेदने के लिये तैयार होना होगा
*भाजपा के लिये अनलकी रही लहार में क्या चलेगी परिवर्तन की बयार?*
तीन दशक से अधिक समय से लहार में जोरआजमाइश कर रही भाजपा के लिये लहार सीट हमेशा "अनलकी" साबित हुई है विभिन्न राजनीतिक प्रयोग करने के लिये लहार को सियासी प्रयोगशाला बना चुकी भाजपा ने तमाम राजनीतिक रसायनों का प्रयोग किया कुछ परखनली शिशुओं को जन्म देकर बेंटिलेटर पड़ी मृतप्राय पड़ी भाजपा को संजीवनी देने का प्रयास की किया किन्तु सभी प्रयास असफल रहे इसका सबसे बड़ा कारण रहा रणनीतिक चूक ,कांग्रेस की प्रतिद्वंदिता करने के लिये केवल उसे देखकर रणनीति बनाने का कार्य करने वाले रणनीतिकार भले ही अपने आप मे स्वयंभू चाणक्य हो किन्तु उनके लिये चन्द पंक्तियों पेशे खिदमत है
*"औरों के ख़यालात की लेते हैं तलाशी*
*और अपने गरेबान में झाँका नहीं जाता"*
भले ही बीड़ी शर्मा की टीम में क्षेत्रीय नेतृत्व को सांजस्यपूर्ण तरीके से स्थान देकर स्वयंभू राजनीतिक खलीफाओं को साफ राजनीतिक संदेश देकर भविष्य की राजनीति के साफ संकेत दिये हैं लेकिन जमीनी स्तर पर सामंजस्य से ज्यादा महत्वपूर्ण है जनस्पर्श करने बाली राजनीतिक शैली कुचक्रों को भेदने बाली सियासी रणनीति
और अंत मे कुछ पंक्तियाँ
*इस बार हूँ दुश्मन की रसाई से बहुत दूर*
*इस बार मगर ज़ख़्म लगाएगा कोई और*
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