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आलेख - Devanand Nayak Journalist
भिंड-दतिया लोकसभा क्षेत्र की जनता ने वर्ष 1989 से लगातार भारतीय जनता पार्टी पर भरोसा जताया है। हर चुनाव में पार्टी द्वारा घोषित प्रत्याशी को जनता ने समर्थन देकर संसद तक पहुंचाया। यह भरोसा केवल एक पार्टी पर नहीं, बल्कि उस उम्मीद पर रहा है कि क्षेत्र के विकास और समस्याओं के समाधान के लिए मजबूत आवाज उठेगी।
इसी क्रम में वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में मुरैना जिले की राजनीति में हाशिये पर पहुंच चुकीं, वर्ष 2003 में दिमनी से विधायक रह चुकीं संध्या राय को प्रत्याशी बनाया गया। जनता ने विकास की उम्मीद के साथ उन्हें सम्मानजनक जीत दिलाई। यह जीत केवल राजनीतिक नहीं थी, बल्कि क्षेत्र की अपेक्षाओं और विश्वास की जीत थी।
यह भी स्वीकार करना होगा कि माननीय सांसद की संसद में उपस्थिति देश के कई सांसदों की तुलना में बेहतर रही है। उन्होंने अपनी भूमिका निभाने का प्रयास भी किया। लेकिन इसके बावजूद क्षेत्र के कई मूलभूत मुद्दे आज भी अधूरे दिखाई देते हैं, जो अब सवालों के रूप में सामने आ रहे हैं।
सबसे बड़ा और वर्षों से लंबित मुद्दा है भिंड-लहार-कोंच रेलवे लाइन। यह परियोजना आज किस स्थिति में है? क्या इसे संसद में प्रभावी ढंग से उठाया गया? कितनी बार इस मुद्दे को प्राथमिकता दी गई—यह जानना जनता का अधिकार है।
दूसरा महत्वपूर्ण विषय है बेरोजगारी और पलायन। भिंड-दतिया का युवा बड़ी संख्या में गुजरात और महाराष्ट्र जैसे राज्यों की ओर रोजगार की तलाश में पलायन कर रहा है। यह केवल आर्थिक समस्या नहीं, बल्कि क्षेत्रीय विकास की कमी का संकेत है। सवाल यह है कि इस मुद्दे को कितनी गंभीरता से उठाया गया और स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन के लिए क्या ठोस प्रयास किए गए?
इसी तरह सैनिक स्कूल का मुद्दा भी चर्चा का विषय रहा है। भागीरथ प्रसाद के कार्यकाल में स्वीकृत सैनिक स्कूल जिला मुख्यालय से मालनपुर क्यों स्थानांतरित हुआ? इस विषय पर अपेक्षित मुखरता क्यों नहीं दिखाई दी?
इसके अलावा अटल प्रगति पथ परियोजना की वर्तमान स्थिति क्या है? क्या इसे संसद में लगातार उठाया गया? क्या यह परियोजना अभी भी प्राथमिकता में है या फाइलों में सीमित होकर रह गई है?
यदि व्यापक दृष्टिकोण से देखें तो शिक्षा, रोजगार और परिवहन जैसे बुनियादी क्षेत्रों में भी अपेक्षित उपलब्धियां स्पष्ट रूप से दिखाई नहीं देतीं। विकास केवल योजनाओं की घोषणा या क्रियान्वयन तक सीमित नहीं होता, बल्कि उसके प्रभाव का जमीन पर दिखना जरूरी होता है।
यह समझना भी आवश्यक है कि किसी जनप्रतिनिधि की जिम्मेदारी केवल सरकारी योजनाओं को धरातल तक पहुंचाना नहीं होती, बल्कि क्षेत्र की समस्याओं को मजबूती से उठाना, उनके समाधान के लिए निरंतर प्रयास करना और जनता की आवाज बनना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
आज भिंड-दतिया की जनता के मन में यही सवाल हैं। यह किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि जवाबदेही की मांग है। यदि आज क्षेत्र में निष्पक्ष सर्वे कराया जाए, तो यह स्पष्ट हो जाएगा कि कितने लोग वास्तव में विकास से संतुष्ट हैं।
अंततः, जनता ने हर बार भरोसा जताया है—अब समय है उस भरोसे के जवाब का।
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