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यकीनन मै निहायत ही छोटा टीकाकार हूं . कभी-कभी मुझे लगता है कि मेरा शुमार बड़े टीकाकारों में होना चाहिए लेकिन ऐसा होता नहीं है,हो नहीं सकता .खैर छोड़िये आज मै आपसे प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के पुनर्गठित मंत्रिमंडल के बारे में के बारे में कुछ कहना चाहता हूँ ,चूंकि मै इस समय परदेश में हूँ इसलिए मेरे कहने से पहले ही वरिष्ठ टीकाकार सब कुछ कह चुके होते हैं इसलिए मुझे कुछ हटकर कहना/लिखना पड़ता है.
आज भी मै आपको ये नहीं बताने वाला कि मोदी जी ने अपने मंत्रिमंडल से किसे और क्यों किनाला और किसे और क्यों शामिल किया ?इस बारे में बड़े-बड़े जानकार सब कुछ लिख-पढ़ चुके हैं .इसलिए माई सबसे पहले निकाले गए मंत्रियों के प्रति अपनी सहानुभूति और संवेदना व्यक्त करता हूँ और मंत्रिमंडल में शामिल किये गए नए मंत्रियों को बधाई और शुभकामनाएं देता हूँ. मेरे पास सहानुभूति,संवेदना,शुभकामनों और बधाइयों के अलावा देने को कुछ है नहीं .जिसके पास जो होता है वो उसी चीज को दे सकता है .
मोदी जी मेरे प्रिय और आदरणीय प्रधानमंत्री हैं. वे संतों जैसे दिखाई देते हैं. जब उन्होंने शपथ ली थी तब वे संतों जैसे नहीं दीखते थे ,वो तो जबसे उन्होंने अपनी दाढ़ी-मूंछ बधाई है तब से उनके व्यक्तित्व में संतत्व झलकने लगा है .आने वाले तीन साल में ये संतत्व टपकने भी लग सकता है .खैर मोदी जी ने बीते सात साल में सत्ता में रहकर जो अनुभव किये हैं उसका प्रभाव उनके नए मंत्रिमंडल पर साफ़ दिखाई दे रहा है .पारदर्शिता इसी को कहते हैं,लेकिन विपक्ष इसे मानेगा थोड़े ही ?
नए केंद्रीय मंत्रिमंडल के लिए पहले मेरे मन में आया कि लिखू-' जस दूलहु तसि बनी बराता। कौतुक बिबिध होहिं मग जाता॥'फिर तमाम सोच-विचार के बाद मैंने अपना इरादा बदल दिया.मुझे लगा कि ये तुलना ठीक नहीं है .हमारे यहां किसी भी क्रिया का तुलनात्मक विवेचन करने की पुरानी प्रथा है. भगवान शिव की शादी के समय ही तो ये कहा गया था कि - ' जस दूलहु तसि बनी बराता। कौतुक बिबिध होहिं मग जाता॥'मुझे लगा नहीं..नहीं ये उपमा नए मंत्री मंडल के लिए उचित नहीं है. देखिये अपने राम घोड़ी पर भी बैठे हैं और बारातों में भी खूब शामिल हुए हैं इसलिए जानते हैं कि कब,क्या कहा जाना चाहिए ?मेरे हिसाब से नया मंत्रिमंडल मोदी जी के अनुरूप नहीं है .इसलिए कहा जा सकता है कि -' सुर समाज सब भाँति अनूपा। नहिं बरात दूलह अनुरूपा॥'
हमारे प्रधानमंत्री जी जिस निष्ठा और समर्पण से काम करते हैं उसके हिसाब से नयी टीम काम कर पाएगी ,कहना कठिन है .मोदी जी की पुरानी टीम में सभी एक से बढ़कर एक दिग्गज थे किन्तु बीते दो साल में सबने मोदी जी की सरकार की छवि का क्या हाल किया है,आप सबसे छिपा नहीं है मोदी जी जैसे भोले भंडारी हैं वैसा ही उनका मंत्रिमंडल होना चाहिए लेकिन इसमें तो संघ दक्ष लोगों के अलावा दल-बदलू,और संदिग्ध लोग शामिल हो गए हैं .इसलिए मै कहता हूं कि -' बर अनुहारि बरात न भाई। हँसी करैहहु पर पुर जाई॥
मैंने पहले ही कह दिया है कि मै आज माननीय मोदी जे के बारे में कुछ भी ऐसा-वैसा नहीं लिखने वाला ,वो तो मुझे कशीदाकारी नहीं आती वरना आज मै मोदी जी के कशीदे ही काढता क्योंकि बीते ७२ साल में केंद्र में इतना बड़ा मंत्रिमंडल बनाने की किसी की हिम्मत ही नहीं हुई.होती भी कैसे ? इसके लिए 56 इंच का सीना चाहिए जो केवल मोदी जी के पास है .कहते हैं कि -'भारत के इतिहास में पहली बार सबसे बड़ा कैबिनेट विस्तार किया गया। आपको शायद पता न हो तो जान लीजिये कि सर्वार्थ सिद्धि योग में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मंत्रिमंडल के 43 मंत्रियों ने शपथ ली। उस मुहूर्त में, जिसमें किए सभी काम सफल होते हैं। शपथ लेने के लिए 34 ने हिंदी को और 9 ने अंग्रेजी भाषा को चुना।
मुझे पूरा यकीन है कि आप शपथ विधि समारोह के दौरान पूरे समय टीवी के परदे से चिपके रहे होंगे इसलिए आपको सब कुछ पता होगा ही,फिर भी जान लीजिये कि 36 नए मंत्रियों ने शपथ ली है । नए मंत्रियों में सबसे ज्यादा 7 उत्तर प्रदेश और फिर 3 गुजरात से हैं। दोनों ही राज्यों में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं।मोदी जी किसी को संगदिल नजर आते हूं तो उसे अपने चश्मे का नंबर बदलवा लेना चाहिए ,क्योंकि हकीकत में वे मोम दिल इंसान हैं .अगर ऐसा न होता तो भला वे मौजूदा मंत्रियों में से 7 को प्रमोट करते ?
मोदी जी ने जिन सात मंत्रियों को पदोन्नत किया है वे सबके सब गाय हैंगाय ! अपने पिछले कार्यकाल में इन बेचारों ने अपनी पूंछ भी मोदी जी की मर्जी के बिना नहीं हिलाई थी . इसी सीधेपन पर फ़िदा होकर मोदी जी ने अनुराग ठाकुर, जीके रेड्डी, मनसुख मंडाविया, किरन रिजिजू, आरके सिंह, हरदीप सिंह पुरी और पुरषोत्तम रूपाला को कैबिनेट मंत्री का दर्जा दिया है।
मोदी जी न 'सबका साथ,सबका विकास' नारा दिया था,आज उसे पूरा करके भी दिखाया.मोदी जी ने हाल ही में बंगाल में बुरी तरह से हारने के बावजूद बंगाल को सोनार बांग्ला बनाने की गरज से ४ मंत्री बनाये हैं ताकि ममता दीदी को कोई शिकायत न रहे. मध्यप्रदेश में तश्तरी में रखकर राज सत्ता दिलवाने वाले ज्योतिरादित्य सिंधिया को मंत्री बनाकर मोदी जी ने प्रमाण दे दिया है कि वे जुबान के पक्के हैं.भले ही उन्हें इसके लिए अपने पुराने साथी थावर चाँद गहलोत की बलि देना पड़ी हो.वीरेंद्र बाबू की लाटरी खुली सो अलग. मोदी जी ने अपने हनुमान चिराग का ख्याल रखते हुए उनके चाचा पारस को भी मंत्री बना दिया,शायद आगे वे राम विलास पासवान की तरह सचमुच के पारस साबित हों.
मै तो मोदी जी के तजुर्बोब का मुरीद हूँ,उन्होंने मेरे गृह प्रदेश उत्तर प्रदेश का साइज देखकर वहां एक-दो नहीं पूरे सात मंत्री बना दिए .अब होने वाले विधानसभा चुनाव में मतदाताओं को उनसे कोई शिकायत नहीं करना चाहिए.आखिर कितना प्रतिनिधित्व लीजियेगा ? महाराष्ट्र में सियासी गुण्डत्व का मुकाबला करने के लिए मोदी जी ने अपने ४ साथियों को मैदान में मंत्री बनाकर छोड़ा है,अब देखते हैं कि फादर स्टेन स्वामी की मौत का दाग ये सब धो पाते हैं या नहीं ? मोदी जी ने उस तमिलनाडु से भी एक को मंत्री बना दिया जहाँ उनका कोई ख़ास नामलेवा नहीं है .
मोदी जी का नया मंत्रिमंडल सही अर्थों में संतुलित मंत्रिमंडल है. ,एक ही कसर रह गयी कि इसमें बिखंडित जम्मू-कश्मीर से कोई आदमी भर्ती नहीं किया गया .कर देते तो अच्छा होता .मोदी जी पर अपनी पत्नी का त्याग करने की वजह से अक्सर विरोधी महिला विरोधी होने का आरोप लगते हैं किन्तु ये सरासर गलत है. मोदी मंत्रिमंडल में अब सबसे ज्यादा महिलाएं हैं। उत्तर प्रदेश से अनुप्रिया पटेल, कर्नाटक से शोभा करंदलाजे, गुजरात से दर्शना विक्रम जरदोश, दिल्ली से मीनाक्षी लेखी, झारखंड से अन्नपूर्णा देवी, ओडिशा से प्रतिमा भौमिक, महाराष्ट्र से भारती प्रवीण पवार ने शपथ ली। कैबिनेट में पहले से ही 4 महिला मंत्री हैं। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, कपड़ा मंत्री स्मृति ईरानी, खाद्य मंत्री साध्वी निरंजन ज्योति और आदिवासी मामलों की राज्य मंत्री रेणुका देवी हैं। नए और पुराने को मिलाकर मंत्रिमंडल में 11 महिलाएं हो गई हैं।
मोदी जी की शैक्षणिक उपाधियों को लेकर दुनिया को संदेह हों लेकिन मुझे बिलकुल नहीं है,क्योंकि मै उनका जातीय गणित देखकर भौंचक हूँ ,उन्होंने अपने मंत्री मंडल में 12 दलित,8 आदिवासी ,27 ओबीसी और 5 अल्पसंख्यकों को मंत्री बनाकर एक साथ 36 राज्यों का भला कर दिया.अब ये मत कहिये कि देश में इतने राज्य हैं भी या नहीं ? ये मोदी जी का ही गणित ज्ञान है जो उन्होंने अपने मंत्रिमंडल की औसत आयु 61 से घटाकर 58 कर दी.वरना ये कितना कठिन काम है .ये मोदी जी का ही कलेजा है जो वे आने वाले तीन साल पढ़े-लिखे मंत्रिमंडल के साथ देश की तकदीर संवारेंगे .
मोदी जी के मंत्रिमंडल में एक से बढ़कर एक पुरोधा हैं जिनकी उपाधियों पर संदेह नहीं किया जा सकता. मिसाल के तौर पर हमारे विशेषज्ञ बता रहे थे कि नए मंत्रिमंडल में 68 मंत्री स्नातक,13 वकील,7 पूर्व नौकरशाह ,7 पीएचडी ,6 चिकित्सक ,5 इंजीनयर और 3 एमबीए हैं प्रधानमंत्री जी का ही साहस था कि उन्होंने अपने मंत्रिमंडल को संतुलित बनाने के लिए अपने 12 भरोसे के साथियों को मंत्री मंडल से निकल बाहर करे में एक क्षण भी बर्बाद नहीं किया .अब इनका इस्तेमाल कैसे होगा ये जेपी नड्ढा जी तय करेंगे .
कुलजमा मोदी जी कमंत्री मंडल शिव की बरात से रत्ती भर कम नहीं है.मोदी जी अपने मंत्रिमंडल को देखकर जब मुस्कराये होंगे तबके लिए ही लिखा गया होगा कि-नाना बाहन नाना बेषा। बिहसे सिव समाज निज देखा॥मेरा अपना अभिमत ये है कि मोदी जी ने अगली बिसात के लिए टॉस के सभी पत्तों को इस तरह से फेंट दिया है कि इसमें छिपी तुरुप और जोकर को खोजना विपक्ष और देश के मतदाताओं के लिए कठिन नहीं तो बहुत आसान भी नहीं होगा .इति मित्थम.
@ राकेश अचल

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