बिगड़े चेहरों का 'मेक-ओव्हर '



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चेहरे कभी एक जैसे नहीं रह सकते,फिर ये चेहरे इंसान के हों या सियासी दलों के. इस समय 'बवा' ने हर तरह के चेहरों को बिगाड़ रखा है .मंहगाई ,बेरोजगारी और जानलेवा बीमारी से रैयत के चेहरे बिगड़े हुए हैं तो नाकामी की वजह से सियासी दलों और नेताओं के   चेहरे खराब हो चले हैं,लिहाजा समझदार सियासी दलों ने अपने चेहरों का 'मेक ओव्हर 'करने के लिए कमर कस ली है .जिसका चेहरा जितना खराब है उसकी तैयारी उतनी ही जबरदस्त है .
आप चौंकेंगे इस खबर को सुनकर,लेकिन खबर सही है,सही ही नहीं बल्कि  सौ फीसदी सही है .इस समय मुल्क में सबसे ज्यादा भयानक चेहरा सत्तारूढदल का है इसीलिए सबसे जोरदार ' मेक ओव्हर' की तैयारी  भी उसी की है.सत्तारूढ़ दल को अहसास हो गया है की खराब चेहरा लेकर वो न 2022  के विधानसभा चुनावों में जा सकती है और न 2024  के आम चुनावों में .कोविड-19 के दौरान सरकारी अस्पतालों में बदइंतजामी की वजह से लोग कीड़े -मकोड़ों की तरह मरे उसे रैयत भुला नहीं सकती. कम से कम जिसके घर में कोविड का शिकार कोई मरीज बिना ऑक्सीजन और इंजेक्शन के मरा होगा वो तो इस नाकामी को भूल ही नहीं सकता .
कोविड-19  की पहली लहर के दौरान तो रैयत ने देश के प्रधानमंत्री का मान रखते हुए उनके आव्हान पर खूब तालियां और थालियां बजाईं थीं लेकिन दूसरी लहर के दौरान जिस तरह से सरकार और सरकारी पार्टी ने जनता के जीवन के बजाय सियासत को तवज्जो दी थी उसने सरकार और सरकारी पार्टी का चेहरा खलनायक जैसा बना दिया है. टीकाकरण में नाकामी ने इस चेहरे को और विकृत कर दिया .घर-घर राशन पर रोक की सरकारी  कोशिशों से जनता ने पहचान लिया की कौन उसका है और कौन पराया ?
ताजा खबर ये है कि मोदी सरकार की धूमिल हो चुकी छवि  को सुधारने के लिए सरकारी पार्टी भाजपा  ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की राह पकड़ ली  है। इसी के तहत भाजपा ने 'सेवा ही संगठन' नाम का कार्यक्रम हाथ में लिया है  । पार्टी के अध्यक्ष जेपी नड्डा ने इस अभियान के दूसरे चरण में कार्यकर्ताओं से टीकाकरण  अभियान में हिस्सा लेने को कहा है।
पार्टी और सरकार की छवि सुधरने के लिए अब पार्टी कार्यकर्ताओं से कहा गया है कि वे नड्डा ने कार्यकर्ताओं से कहा है कि वे टीकाकरण  अभियान के अलावा राहत अभियानों और गांवों में स्वयंसेवी कार्यकर्ताओं की ट्रेनिंग में हिस्सा लें।कार्यकर्ता ये निश्चित करें कि 45 साल से ऊपर आयु वाले सभी लोगों को वैक्सीन की दोनों डोज लगा दी जाएं।
पार्टी कार्यकर्ताओं को हिदायत दी गयी है कि चूंकि 18-44 के बीच आयु वर्ग में संक्रमण की आशंका ज्यादा है इसलिए इस  विशेष आयु वर्ग  को वैक्सीनेट करवाने पर फोकस करें, खासतौर पर सामानों की डिलीवरी करने वालों, ऑटो रिक्शा ड्राइवर, घरों में कामकाज करने वाले, न्यूज पेपर बांटने वाले, गैस सिलेंडर्स की डिलीवरी करने वालों को वैक्सीनेशन के लिए जागरूक करें।
भाजपा कार्यकर्ताओं से कहा गया है कि वेरक्तदान शिविर आयोजित करें। जरूरतमंदों को अस्पतालों और दूसरी जगहों पर खाना मुहैया कराने के लिए राशन और खाने की व्यवस्था करें।उन घरों में जाएँ  जहां बूढ़े लोग परेशानियों का सामना कर रहे हैं या फिर सभी संक्रमित हैं। इन तमाम उपायों से भाजपा और मोदी सरकार का चेहरा कितना सुधर पायेगा अभी कहना कठिन है,किन्तु कोशिश तो कोशिश होती है .भाजपा राम मंदिर जमीन के सौदे में कथित घोटाले की खबरों से भी परेशान है.आप कह सकते हैं कि मोदी और नड्डा के हाथों के तोते  उड़े हुए हैं .
चेहरा खराब होने  की फ़िक्र तो कांग्रेस को भी है ,क्योंकि आये दिन पार्टी से अनेक नेता पिंड छुड़ाकर भाजपा में शामिल हो रहे हैं ,लेकिन कांग्रेस के नेताओं की और से अभी चेहरे चमकाने की कोई योजना सामने नहीं आयी है .कांग्रेस योजनाएं बनाने में आज से नहीं बल्कि एक आरसे से भाजपा से मीलों पीछे चल रही है .बीते सात साल में भाजपा के दो अध्यक्ष बन गए लेकिन कांग्रेस के पास संगठन में काम करने के लिए अलग से कोई चेहरा नहीं है.कांग्रेस का चेहरा ले-देकर राहुल गांधी हैं और वे आंधी पैदा करते-करते अचानक नेपथ्य में चले जाते हैं ,हालांकि उन्होंने भी देश सेवा के लिए अभी तक अपना घर नहीं बसाया है .
देश में सियासी दलों के चेहरों पर यदि एक नजर डाली जाये तो हाल के दिनों में बंगाल जीतकर तृण मूल कांग्रेस और पार्टी की   मुखिया सुश्री ममता बनर्जी का चेहरा जरा सा चमका है .बीएसपी ने पंजाब में अकालियों से गठजोड़ कर अपना बुझा हुआ चेहरा चमकाने की शुरुवात कर दी है .सामाजवादी पार्टी का चेहरा तो इन दिनों देखने लायक है. उसके पास  अपना चेहरा चमकने के लिए कोई योजना है भी या नहीं,कोई नहीं जानता ,सिवाय अखिलेश यादव के .बिहार की जेडीयू ने तो पहले ही भाजपा के साथ मिलकर अपना चेहरा चमका लिया था,और अब चिराग पासवान की पार्टी का सफाया कराकर जेडीयू अपने चेहरे की कांटी और चमकना चाहती है .वामपंथी चेहरा चमकाने के फेर में इसलिए नहीं है क्योंकि उनके पास फ़िलहाल जो भी है वो बहुत है.वामपंथी थोड़े में गुजारा करने के आदी हो चुके हैं .
असल सवाल तो ये ही कि क्या आने वाले दिनों में भाजपा और कांग्रेस के बिगड़ चुके चेहरे कुछ बदले-बदले नजर आएंगे ?कांग्रेस का चेहरा बदले या न बदले इससे देश की सियासत पर कोई ख़ास फर्क पड़ने वाला नहीं है किन्तु यदि भाजपा का चेहरा अपेक्षानुसार न बदला तो आने वाले दिनों में देश की सियासत का चेहरा जरूर बदलता नजर आएगा .माननीय प्रधानमंत्री जी ने तो बीते दो साल में अपना चेहरा बदलने की भरपूर कोशिश की लेकिन उनके चेहरे पर न दाढ़ी-मूंछ बढ़ाने से तेज में श्रीवृद्धि हुयी और न पोशाकें बदलने से व्यक्तित्व में .वे जैसे घर-घर पहुंचे थे ,वैसे ही अब घर-घर में आलोचना के पात्र बने हुए हैं .जबकी उनकी अपनी कोशिशें प्रणम्य मानी जाती हैं,लोग मानें या न मानें ये अलग बात है .
आने वाले दिनों में यदि राजनीतिक कार्यकर्ता आपके सामने एप्रिन पहने प्रकट होने लगें तो हैरान  मत होइए,सत्ता आदमी से सारे ठठकर्म [षठ कर्म ] करा लेती है .सत्ता के लिए कौन कितना नीचे और कौन कितना ऊपर जा सकता है,आप कल्पना नहीं कर सकते .कल्पना करना भी नहीं चाहिए.
@ राकेश अचल

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