कटघरे में केंद्र : टीकाकरण पर सुप्रीम फटकार


देवानंद नायक साकांक्ष न्यूज़ 9713989417
कोरोना संकट की मार से दुनिया के तमाम देश जूझ रहे हैं। ऐसे में केंद्र सरकार की गलत नीतियों की वजह से हिंदुस्थान भी इसकी मार से खासा बेहाल है। देश के अधिकांश राज्यों में वैक्सीन की कमी हो गई, जिसके बाद राज्य सरकारों ने केंद्र से वैक्सीन की मांग की तो सरकार ने पल्ला झाड़ लिया। अंत में यह मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया। अब कोर्ट ने केंद्र सरकार को आड़े हाथों लिया है। सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने केंद्र पर कई सवाल दागे। केंद्र से सवाल करते हुए अदालत ने पूछा कि कोरोना वैक्सीन की खरीद को लेकर राज्यों को क्यों अधर में छोड़ दिया गया? अदालत ने वैक्सीन की कीमत में अंतर को लेकर भी केंद्र सरकार से सवाल पूछा है। अदालत ने कहा कि पूरे देश में टीकों की एक कीमत होनी चाहिए। इसके अलावा कोर्ट ने कोविन ऐप पर अनिवार्य पंजीकरण को लेकर भी केंद्र से कई सवाल-जवाब किए।
सर्वोच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति डी. वाई. चंद्रचूड़ की अध्यक्षतावाली न्यायमूर्ति एस. रवींद्र भट और एल. नागेश्वर राव की खंडपीठ कोरोनो संक्रमित मरीजों को आवश्यक दवाओं, टीकों और ऑक्सीजन की आपूर्ति से संबंधित एक स्वत: संज्ञान मामले की सुनवाई कर रही थी। सुनवाई के दौरान, सुप्रीम कोर्ट ने इस तथ्य का उल्लेख किया कि वैक्सीन के लिए राज्य खुद वैश्विक निविदाएं जारी करने की प्रक्रिया में हैं। पीठ ने केंद्र सरकार से पूछा कि राज्यों को क्यों ऐसे अधर में छोड़ दिया गया?
सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि टास्क फोर्स की रिपोर्ट लगभग पूरी हो चुकी है। स्थिति नियंत्रण में है। इस पर जस्टिस भट ने कहा कि मैं जो एकमात्र समस्या रख रहा हूं, वह पूरे देश को वैक्सीन उपलब्ध कराने की है। केवल एक चीज जिसे हम संबोधित करना चाहते हैं वह है मूल्य निर्धारण नीति। आप राज्यों से एक-दूसरे को प्रतिस्पर्धा करने के लिए कह रहे हैं।
ग्रामीण क्षेत्रों में होगी कठिनाई
पीठ ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से पूछा कि कई राज्य कोविड-१९ के लिए विदेशी टीके खरीदने के लिए वैश्विक निविदा जारी कर रहे हैं। क्या यह केंद्र सरकार की नीति है? अदालत ने कहा कि राज्यों को क्यों अधर में छोड़ दिया गया है? शीर्ष अदालत ने टीकाकरण के लिए कोविन पोर्टल पर अनिवार्य पंजीकरण को लेकर केंद्र से सवाल किया और कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को इस वजह से कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है।

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