शब्दास्त्र: रेत का खेल ,माफिया ,खाकी और खादी


भिंड जिले में नदियों का सीना चीर कर रेत निकाल ने का खेल नही है क्या खाकी ,क्या खादी  और क्या पत्रकार और क्या प्रशासन  इस खेल से कोई अछूता नही है जिले की सिंध नदी और चम्बल नदी से करोड़ो रूपये की खनिज संपदा रेत के रूप में निरंतर चोरी की जा रही है इस खेल की शुरुआत नब्बे के दशक में हुई लहार विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत पररायच व रौन की मेहन्दा घाट खदान उस समय बहुत ज्यादा ख्याति प्राप्त कर रही थी 
आज जिले में 5 दर्जन से ज्यादा रेत खदानों पर अबैध उत्खनन होता  हैं यह उत्खनन  खाकी , खादी और माफियाओं के गठजोड़ ही करवाता है  नदी का चीरहरण करने बाले राजनीतिक दलों के कार्यकर्ता भी है और पुलिसकर्मियों के मित्र भी हैं  
भले ही नेता रेत उत्खनन को लेकर नूरा कुश्ती खेलें लेकिन यह बात स्पष्ट है जो आरोप प्रत्यारोप की राजनीति कर रहे हैं उनके दामन में भी रेत को महक आती है  खाकी के गठजोड़ की बात करें तो यह कई बार खुलासा हो गया है कि खाकी का खुला संरक्षण रेत माफियाओं को रहा है जिले के एक दिवंगत पत्रकार ने दो एसडीओपी का स्टिंग ऑपरेशन कर रेत के गठजोड़ का खुलासा किया था  बाद में ट्रक से  कुचल कर पत्रकार की सन्देहास्पद मौत हो गई   भिंड के एक तत्कालीन एसपी के ट्रांसफर के विरोध में एक रेत माफिया सड़क पर मार्च भी निकाल चुका है  एक मशहूर कहावत है कि नौ सौ चुहे खाकर बिल्ली हज को चली  यह कहावत चरितार्थ करते हुए  भिंड जिले के नेेता रेत खनन  करवाने  
आरोप लगाते नजर आ रहे हैं क्या इन नेताओं को नही पता कि इन्ही की पार्टी के कार्यकर्ता ,इन्ही के संरक्षण में रेत का काला कारोबार कर रहे  है रेत माफिया कैसे पार्टियों के कार्यक्रमों से लेकर जनप्रतिनिधियों के साथ तक नजर आते रहे हैं 
रेत का काला कारोबार में तब तक खादी और खाकी की दोस्ती है जब हित साधने में सफल है बाद में दूध में गिरी मख्खी की तरह उन्हें बाहर फेंक दिया जाता है 
रेत का कारोबार करने बालों का सिंडिकेट सत्ता के गलियारों से विपक्ष की दहलीज तक हर जगह अपनी दखल रखता है प्रशासन नौकरशाही इनके हाथो की कठपुतली बन कर नाच रहे हैं 
चुनाव विधानसभा के हो अथवा लोकसभा के रेत माफिया चुनाव प्रचार में नजर आते हैं  कई रेत माफियाओं को तो पंचायत चुनाव में जनप्रतिनिधियों के रूप में चुना गया है इनका मुखविर तंत्र इतना मजबूत है कि कार्यवाही से पूर्व सूचना उन्हें मिल जाती है रेत की कमाई का हिस्सा रकनीतिक आका व संरक्षकों भी जाता है
भिंड में भले ही एसपी नागेंद्र की जगह मनोज कुमार सिंह पदस्थ हो जाये किन्तु यह तंत्र तब तक नही टूटेगा जब तक इनके संरक्षकों पर सख्त कार्यवाही न हो  

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