यूँ तो राजनीति संभवनाओ का खेल रहा है कब कौन अर्श से फर्श पर आ जाये और कब फर्श से अर्श पर्व कहा नही जा सकता
प्रदेश की सियासत में 15 महीनों तक सियासत का सिकन्दर रहे कमलनाथ अब सत्ता से 'अनाथ' हुई कांग्रेस को बचाने व भाजपा को 'नाथने' के लिए रणनीतियों को बनाने में जुटे हैं
सूबे के सरदार रहे कमलनाथ को बेदखल करने में यूं तो प्रदेश की सियासत में कांग्रेस के "महाराज" की अहम भूमिका रही सियासी उपेक्षा के शिकार कांग्रेस के महाराज यानी ज्योतिरादित्य सिंधिया भाजपा के हो गए उनके साथ उनके 22 सिपहसालार (विधायक) भी पार्टी व सदन की सदस्यता छोड़ भगवा रंग में रंग गए और होली के उत्सव पर ही कांग्रेस के रंग में भंग पड़ गया
चूंकि प्रदेश में 22 सिंधिया समर्थक व दो विधायको की मृत्यु (जौरा -बनवारी लाल शर्मा व आगर मालवा -मनोहर ऊंटवाल) के कारण उपचुनाव होना है इन उपचुनावों के माध्यम से सत्ता से वेदखल हुई कांग्रेस को पुनः सत्तासीन होने की रणनीति कमलनाथ बना रहे हैं इन रिक्त हुई सीटों में सर्वाधिक सीट ग्वालियर-चंबल अंचल के इलाके से आती है इस अचंल में अभी तक सिंधिया कांग्रेस का सबसे बड़ा चेहरा रहे हैं किंतु सिंधिया के भाजपाई होते ही अंचल की सियासत में उनके कद का कोई चेहरा कांग्रेस में नही बचता है इसीलिये पार्टी ने इस अंचल में 16 सीटों पर उपचुनाव की जिम्मेदारी दो वरिष्ठ नेता डॉ गोविंद सिंह व रामनिवास रावत को सौंपी है
डॉ गोविंद सिंह भिंड जिले की लहार सीट से 7वीं बार लगातार जीत दर्ज करा चुके हैं और इस लिहाज से कांग्रेस के सबसे कद्दावर विधायक हैं दिग्गविजय सिंह गुट के झंडावरदार डॉ गोविंद सिंह लगातार समय समय पर महल की सियासत पर मुखर होते रहे हैं और अपना कद बड़ा करने का प्रयास भी करते रहे किन्तु सिंधिया के रहते कांग्रेस में यह संभव नहीं हो पाया अभी हाल ही में पंजाब केसरी के संवाददाता से बातचीत में उन्होंने सिंधिया पर कई आरोप लगाए हैं साथ ही यह भी कहा कि उन्हें हराने के लिये सिंधिया हमेशा प्रयास करते रहे हैं
दूसरे नेता रामनिवास रावत की बात करें तो उनकी सियासत सिंधिया के रहमोकरम पर ही चलती रही है श्योपुर जिले से तालुकात रखने वाले रावत न लोकसभा चुनाव जीत सके न विधानसभा
पार्टी में गुटीय सामंजस्य के चलते प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष पद से नवाजे गए हैं
इन्ही दोनों नेताओ को ग्वालियर चंबल में सिंधिया के कद के बराबर का नेता बनाने व 22 सीट जीतने के लिये कांग्रेस ने इन्ही के कंधों पर जिम्मेदारी सौंपी है ।
क्या सियासी संकट से कांग्रेस को उभार पाएंगे गोविंद ?
यूँ तो गोविंद सिंह की महत्वकांक्षा सदैव से सियासत में बड़ा रसूख हांसिल कर केंद्र तक दखल की रही है और कांग्रेस के अंदर काफी हद तक सूबे में उनकी धमक भी रही है किंतु केंद्र की सियासत में पहुंचने की उनके आस पूरी न हो सकी है 2014 के लोकसभा चुनावों में इसी महत्वकांक्षा के चलते डॉ सिंह मुरैना से लोकसभा चुनाव लड़े किन्तु परिणाम अनुकूल नही रहे अब यह उपचुनाव डॉ गोविंद सिंह के लिये सुनहरा मौका है जब वह अपनी ताकत का लोहा मनवाकर कांग्रेस के दिल्ली दरबार मे अपनी धमक बड़ा सकते हैं इसलिए सिंधिया के समकक्ष कद के लिये "गोविंद-रावत"प्रयासरत है और अधिकाधिक क्षेत्रों में अपना प्रभाव बढ़ाने का प्रयास कर रहे हैं किंतु रामनिवास रावत और डॉ गोविंद सिंह के मध्य कद बड़ा करने की होड़ कांग्रेस के लिये मुसीबत न बन जाये क्योकि वर्चस्व की इस जंग में हुए टकराव से सीधा फायदा भाजपा उठा सकती है
गोविंद को गढ़ में घेरने को तैयार सिंधिया खेमा
भिंड जिले की लहार सीट जहां से कांग्रेस के डॉ गोविंद सिंह 7 वीं बार विधायक हैं कांग्रेस के गढ़ के रूप में प्रचारित है भाजपा यहां विभिन्न राजनीतिक प्रयोग कर चुकी है किंतु हर बार यहां असफलता ही हाथ लगी है दरअसल लहार में जमीनी हकीकत से जुड़कर यहां के सियासी समीकरणों की पड़ताल करने पर एक बात स्पष्ट होती है कि यह गोविंद का गढ़ नही बल्कि विपक्ष विहीन क्षेत्र है यहां के स्थानीय नेता जो गुटबाजी और सौदेबाजी के चलते कांग्रेस विधायक के हाथों की कठपुतलियों के रुप में वर्षो से कार्य करते रहे हैं यहां एक बात और स्पष्ट रुप से देखने को मिलती रही है कि जहां विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के डॉ गोविंद सिंह चुनाव जीतते हैं वही लगातार लोकसभा चुनावों में कांग्रेस हारती रही है
इसी लहार और भिंड की दो सीटों मेहगांव व गोहद जहाँ उपचुनाव होना है को लेकर सिंधिया खेमा गोविंद को यहीं यानी ग्रह जिले में ही घेरने की तैयारी कर रहा है पंजाब केसरी से बातचीत में लगाये गोविंद सिंह के आरोप पर पलटवार करते हुए सिंधिया खेमे के खास सिपहसालार अशोक चौधरी ने गोविंद सिंह को गोहद - मेहगांव सीट ही जिताकर दिखाएंगे ऐसी चुनौती दी है
गोविंद सिंह पर लगातार हमलावर अशोक चौधरी व ज्योतिरादित्य सिंधिया पर टिप्पणी करने के मामले में 9 अप्रैल को भिंड देहात थाने में कांग्रेस के आईटी सेल के नेता शालू पुरोहित व शिवशंकर सिंह भदौरिया व शिशुपाल सिंह पर FIR दर्ज हुई है वही एक अन्य शिकायत के आधर पर लहार में भाजपा से जुड़े दो युवकों पर लहार थाने में कायमी हुई है सिंधिया के नजदीकी व लहार के आलमपुर(खिरिया) कस्बे के निवासी अशोक चौधरी कांग्रेस के प्रदेश महासचिव थे और सिंधिया के पार्टी छोड़ने के बाद उन्होंने भी कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया था पिछले दिनों अशोक चौधरी लहार की क्षेत्रीय सियासत पर काफी नजर रख रहे हैं गोविंद सिंह पर हमलावर नजर आ रहे हैं सियासी सूत्र बताते हैं कि महल की सियासत से 4 दशकों से जुड़े चौधरी को महल से ग्रीन सिग्नल मिलते ही वह लहार में गोविंद सिंह को घेरने में जुट गए हैं

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