लहार : ग्राम बरहा में रामचरित सम्मेलन में पहलवान उपाध्याय दाऊ के सानिध्य में प्रसिद्ध धार्मिक स्थल तालेश्वर सरकार सिद्धबाबा महाराज पर चल रहे रामचरित मानस सम्मेलन में माँ अखलेश्वरी देवी ने कहा दुस्टो के संहार के लिए कोई भी शक्ति की जरूरत नही बे अपने आप मर जाते है वही उन्होंने आगे बोलते हुए कहा की माता पिता की सेवा सबसे बढ़ा पुण्य होता है उन्होने कहा माता पिता संसार मे प्रत्यक्ष देवता है इनकी सेवा ही सबसे बढ़ा भजन है आप भजन न करे ,मंदिर न जाये ,कथा न सुने चलेगा पर यदि आप अपने माता पिता की सेवा नही करते है तो नही चलेगा ,जो व्यक्ति अपने मातापिता को कष्ट देता है वो जीवन मे कभी सुखी नही रेह सकता ,माता पिता की आँखो से जीवन मे सिर्फ दो ही वार आँसू निकलते है एक जब बेटी घर छोड़कर जाती है तब और दूसरा जब बेटा मुख मोड़ता है तब ,भगवान राम ने भी कहा है की वही पुत्र भाग्यवान होता है जो माता पिता के वचनों को मानता है ऐसे व्यक्ति की मुट्ठी मे पुण्य के चारो पदार्थ होते है ।
अर्थ ,धर्म ,काम ,मोक्ष ,जिनको माता पिता के लिये बेटा प्राणों से प्रिये होता है , बेटे के लिय कितने भी कष्ट सहन करते है कितनी भी सर्दी पड़ रही हो बालक यदि बिस्तर पर पिसाब कर लेता है तो माँ उसे सूखे मे लेटाकर खुद रात भर गीले मे लेटी रेहती है एक माता के कितने भी बच्चे हो उनका पालन पोषण करने मे उसे कभी कोई कष्ट नही होता है पर विडंबना तो ये है की जब वह बूँडे हो जाते है तब 10 पुत्र भी मिलकर अपने माता पिता को सुखी नही रख पाते यह व्याख्यान उन्होने रामचरित मानस सम्मेलन के दौरान ग्राम बरहा में कहे ।
*ध्रुव चरित्र पर बोले आचार्य शशिभूषण जी महाराज*
ध्रुव चरित्र की कथा कहते हुए महाराज आचार्य शशिभूषण दास जी महाराज ने माताओं को शिक्षा दी की घर को घर नही केहते बल्कि स्त्री का नाम ही घर है स्त्री अगर चाहे तो अपने घर को बेकुन्ठ बना दे बालक की प्रथम गुरु माँ होती है मातायें कभी ये न सोचे की मेरा बच्चा जब तक स्कूल मे रेहता है तभी तक पढ़ाई करता है बच्चा 24 घंटे पाठशाला मे रेह्ता है वो देखता है मेरी माँ क्या कर रही है पिता क्या कर रहा है इसलिये बच्चो के सामने कभी अनुचित शब्दों का प्रयोग नही करना चाहिये ,अपने बच्चो को अच्छे संस्कार देना चाहिये।।।
*विष तो एक बार ही मारता है लेकिन विषय मानव को बार बार मारता है-रमेशदास जी महाराज*
रामचरित मानस सम्मेलन में मानस मराल रमेश दास जी महाराज ने अपनी कथा के माध्यम से बताया कि कर्दम ऋषि देवहुति पति पत्नी बन गए,पत्नी देवहुति ने अपने पति का मन पकड़ लिया,मन पकड़ने का मतलब पति की बात पकड़ लेना ही मन पकड़ना है,राजा दक्ष की कथा सुनते हुए कहा की राजा दक्ष ने शंकर जी का अपमान किया दक्ष विरोध मान गया आज भी हमारे समाज एक दुसरे का अपमान करने मई लगे है जो लोग समाज मे कभी अच्छे काम नहीं करते सम्मान सबसे अच्छा चाहते है वे ही राजा दक्ष की तरह अभिमानी है।।
इस मौके पर कुमारी सोनम देवी एवम शिवकुमार जी महाराज दतिया ने बैद पुराण के आख्यान कहे इस मौके पर सेकड़ो भजन प्रेमी मौजूद रहे ।


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