हमारे यहाँ एक पुरानी कहावत है कि "सैंया भये कोतवाल तो डर काहे का" इस कहावत को चरितार्थ करते नजर आया नगर पालिका प्रशासन लहार मामला रविवार का है जब लहार नगर के पचपेड़ा तिराहे पर निर्माणाधीन हॉकर्स जोन में ग्रिल लगाने का कार्य किया जा रहा था उस समय यहाँ ग्रिल लगाने का विरोध करते हुए स्थानीय रहवासियों ने हॉकर्स जोन में आकर धरने पर बैठ गए और विरोध करने लगे स्थानीय लोगों का कहना कि नपा प्रशासन व नागरिकों के बीच सहमति के आधार पर जो समझौता हुआ था नगर पालिका प्रशासन उस समझौता को ताक पर रखकर जबरन मनमाने तरीके से ग्रिल लगाने का कार्य कर रहा है इस घटना के वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुये है उन वीडियो के अनुसार वहाँ नपा प्रशासन के साथ महिला सफाई कर्मचारी भी मौजूद थी अब उनका क्या कार्य था नपा ही जाने ? साथ ही पुलिसकर्मियों की मौजूदगी में धक्का मुक्की व गालीगलौज भी हुई

पूरे मामले में विषय यह नही है कि दोषी कौन ? बल्कि जिस तरह का आचरण जन समुदाय के प्रति किया गया वह निश्चित ही सही नही लहार नगर पालिका परिषद को पूर्ण बहुमत के साथ जनादेश देकर लहार नगर के मतदाताओं ने बड़ी जिम्मेदारी दी है और बड़ी जिम्मेदारी के साथ बड़े कर्तव्य भी जुड़े होते हैं ऐसा क्या हुआ कि नगर पालिका अमले को छुट्टी के दिन पूरे दलबल के साथ उस स्थान पर जालियां लगवानी पड़ गई यह बड़ा सवाल है ?
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