लहार विधानसभा क्षेत्र : 'यात्रा' तो ठीक है पर "विकास" कहाँ है ?


मध्यप्रदेश के मुखिया मध्यप्रदेश में विकास यात्रा निकाल रहे जैसा कि हर चुनाव के पूर्व कभी जनदर्शन तो कभी जन आशीर्वाद यात्रा निकालते रहे हैं इस बार यात्रा का नाम विकास यात्रा है सूबे में कितना विकास हुआ यह तो राज्य की जनता भली भांति जानती ही है किंतु अपने ही विकास को सरकारी नजरिये से दिखाने के लिए जमकर खर्च भी किया जा रहा है साथ ही प्रशासनिक मशीनरी का भी उपयोग किया जा रहा है
यदि बात हम लहार विधानसभा क्षेत्र की करें तो यहाँ भी प्रशासन जैसा कि प्रदेश सरकार की मंशा है उसके अनुरूप विकास यात्रा निकाल रहा है अब विकास यात्रा तो ठीक है किंतु सवाल यह उठता है इन सबके बीच "विकास" कहाँ है
वही विकास जिसे दिखाने के लिए यात्रा निकाली जा रही है मनुष्य की सबसे मूलभूत आवश्यकताओं में रोटी कपड़ा और मकान आता है उसके बाद स्वास्थ ,शिक्षा ,रोजगार सम्मान और सुरक्षा की बात आती है तो सबसे पहले बात रोटी की लहार विधानसभा क्षेत्र में आने वाली तीन तहसीलों के अंतगर्त आने वाले गांवों के 40 से 70 % प्रतिशत युवा रोजी रोटी की जुगाड़ में या तो लाचार मजबूर होकर संघर्ष कर रहा है या पलायन कर गुजरात और महाराष्ट्र की ओर जा रहा है शासन के मनरेगा में रोजगार मिलने की बात है तो यह मामला पूर्व मंत्री व वर्तमान नेता प्रतिपक्ष ने विधानसभा में उठाकर मनरेगा योजना में भ्रष्टाचार की बात कहते हुए लहार व रौन ब्लॉक् की कुछ पंचायतों के नाम सामने रखे थे लेकिन स्तिथि अधिकांश गांवो में बनी हुई है मनरेगा योजना में गॉंव से जनपद तक जमकर भ्रष्टाचार किया जा रहा है मकान की बात आती है तो पीएम आवास योजना में ग्रामीण क्षेत्रों में तो भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई है लहार नगर में ही आवास योजना में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार के आरोप लगते रहे है बात स्वास्थ्य सेवाओं की करें तो लहार के इकलौते सिविल अस्पताल में न तो अल्ट्रासाउंड मशीन है न स्त्री रोग सहित अन्य विशेषज्ञ डॉक्टर यहाँ तक एम्बुलेंस माफियाओं द्वारा इस तरह अपना मकड़जाल फैला रखा कि मरीज और उसके केयरटेकर को इनका शिकार बनते देर नही लगती बड़े स्तर पर बसूली तथा निजी नर्सिंग होम की दलाली में व्यस्त यह एम्बुलेंस माफिया लोगो की जेब काटने में माहिर हैं 

 अगर बात शिक्षा की करें तो इसका स्तर क्या है इसका ताजा उदाहरण हाल ही में ग्राम गंगेपुरा का मामला है जिसमे नेता प्रतिपक्ष ने पत्र क्रमांक 17 दिनांक 16 जन 23 कलेक्टर भिण्ड को लिखा था स्कूल षड्यंत्र के अखाड़े बन रहे हैं , कई स्कूल टीचर राजनीतिक व्यवस्था का हिस्सा बने हैं कुछ पत्नियों के नाम फर्म बना ठेकेदार बने बैठे हैं सुदूर आलमपुर जैसे कस्बे के लिये तहसील लहार काफी दूरी तय करने के बाद आना पड़ता जबकि दबोह तहसील के दर्जा देने की घोषणा मुख्यमंत्री मुन्नी त्रिपाठी की चुनावी सभा को सम्बोधित करते हुये वर्ष 2008 में कर चुके हैं लेकिन अमल आज तक नही हुआ विकास की बात तो तब होती जब लहार को जिला घोषित किया जाता दबोह को तहसील , लहार में कन्या महाविद्यालय की स्थापना होती असवार जैसे विस्तृत आवादी बाले गांव को नगर परिषद का दर्जा दिया जाता अच्छी स्वास्थ्य सेवाओं के लिये पर्याप्त मात्रा में डॉक्टर व संसाधन उपलब्ध करवाए जाते क्षेत्र में रोजगार की दृष्टि से कार्यक्रम बनाये जाते उद्योग विकसित किये जाते प्राचीन धरोहरों को पर्यटन के रुप विकसित किया जाता लेकिन हुआ क्या है विकास के नाम पर यात्रा तो ठीक है पर "विकास" कहाँ है यह सवाल सिर्फ सरकार से है उनके नुमाइंदों से है क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों से है

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