पद्मभूषण बेगम परवीन सुल्ताना की गायकी ने ताना सुरों का शामियाना





संगीत सम्राट को संगीत साम्राज्ञी की रसभीनी स्वरांजलि

संगीत की नगरी ग्वालियर में बुधवार की शाम मौसम सुहाना था ।पर तानसेन समारोह के भव्य मंच पर संगीत सम्राज्ञी पद्मभूषण बेगम परवीन सुल्ताना जी जब मंच पर पधारीं तब रात सर्द हो चली थी। बेगम साहिबा ने अपने बेजोड़ स्वरों की आंच से रात को गर्मा दिया। वहीं सरगम, पल्टों और गमक से सजे उनके गायन से झरीं तानों ने ऐसा शीतल शामियाना तान दिया मानो गर्मी से दहकते दिन में अचानक घनघोर बादल गर्माहट को शीतलता में तब्दील करने के लिए आ गए हों।
बेगम परवीन सुल्ताना ने गान मनीषी तानसेन के चौबारे में गायन के लिए मधुर राग " मारू बिहाग" का चयन किया। इस राग में उन्होंने बड़ा ख्याल गाया, जो कि एक ताल में निबद्ध था। जिसके बोल थे " कैसे बिन साजन रहा न जाए"। अपने गायन को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने तीन ताल में छोटा ख्याल " कवन न कीन्हों "  पेश कर रसिकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

हितेन्द्र सिंह भदौरिया
Department of Culture, Madhya Pradesh
Usha Thakur

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