टाइफाइड के मरीजों को दी जाती है गलत सलाह , बना रहता है जान का खतरा - डॉ हेमंत कुमार जैन


दतिया - दतिया जिले में काम करते हुए मुझे कई साल हो गए है , यहां मरीज जिनको टाइफाइड की जांच की जाती है , या फिर कपड़े सूंघ कर टाइफाइड बताया जाता है ,उन मरीजों का परहेज के नाम पर खाना बंद कर दिया जाता है वो भी 3 सप्ताह के लिए। इस दौरान मरीजों को दवाएं भी शायद नही दी जाती है। खाना ना खाने के कारण और दवाओं के अभाव में मरीज बहुत ही ज्यादा बुरी हालत में खासकर कमजोरी की हालत में  चिकित्सक के पास पहुंचता है । जब भी ऐसे मरीज मेरे पास आते हैं तो उन्हें टाइफाइड के अलावा कई बार और भी बीमारियां जांचों मैं आती है और कमजोरी के कारण मरीजों का इलाज भी लंबा चलता है । 
आपको बताना चाहता हूं कि किसी भी किताब में, टाइफाइड के मरीजों के लिए परहेज का जिक्र नहीं है और टाइफाइड का इलाज 5 से 7 दिन में दवाओं के द्वारा हो जाता है, और वो भी बिना किसी परहेज के । 
इस जानकारी को आपके लिए इसलिए प्रसारित किया जा रहा है ताकि , आप अपने परिजनों को सही तरीके से , और सही चिकित्सक से इलाज करवाएं ताकि किसी लापरवाही के कारण मरीज को लंबे समय तक बीमार ना रहना पड़े। 
लेखक
डॉ हेमंत कुमार जैन 
सहायक प्राध्यापक ,मेडिसिन विभाग , जनसंपर्क अधिकारी एवं सह अस्पताल अधीक्षक,
शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय दतिया

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ