अपना हाथ जगन्नाथ का भात, फिर किसी की क्या बिसात*============== *नियम विरुद्ध मनमाने तरीके से स्थापना व्यय से अधिक भार सहित हो गई नगर परिषद में नियुक्तियां*============ *मामला नगर परिषद कैलारस में हुई फर्जी नियुक्तियों का


 **================= कैलारस/ जिला मुख्यालय मुरैना के महज 45 किलोमीटर की दूरी पर स्थित नगर परिषद कैलारस हमेशा किसी ना किसी बात को लेकर सुर्खियों में बनी रहती है। ऐसी ही सुर्खियां अब नगर परिषद कैलारस में हुई अवैध नियुक्तियों को लेकर शहर भर में चर्चा का विषय बनी हुई है। जन चर्चा अनुसार नगर परिषद कैलारस में जो भी मुख्य नगर परिषद अधिकारी आते रहे है। उन्होंने मनमाने तरीके से नगर परिषद के स्थापना व्यय से अधिक  भार सहित बिना शासन की स्वीकृति के बिना किसी विज्ञप्ति या साक्षात्कार के नियम विरुद्ध अवैध नियुक्तियों की भरमार कर दी है। गौरतलब है कि नियुक्तियों का यह खेला प्रेसिडेंट इन काउंसिल दूसरे शब्दों में कहें तो अध्यक्षीय कार्यकाल से चला आ रहा है। जिसे और आगे बढ़ाते हुए अध्यक्षीय कार्यकाल समाप्त होने के उपरांत प्रशासक नियुक्त होने के बाद आए मुख्य नगर पालिका अधिकारियों ने भी बहती गंगा में हाथ धोना उचित समझा और नगर परिषद कैलारस में धड़ल्ले से नियुक्तियां ठोकते चले गए यहां बता दें कि बाकायदा नगर परिषद में नियुक्तियों के लिए संविदा आधार पर नियुक्ति के लिए शासन ने नियम बनाया हुआ है। जिसके अनुसार मध्य प्रदेश नगर पालिका अधिनियम 1956 (क्रमांक 23 सन 1956) की धारा 58 की उप धारा 2-क के साथ पठित धारा 433 एवं मध्य प्रदेश नगर पालिका अधिनियम 1961 की धारा 94 की उप धारा 9 और 95 के साथ पठित धारा 355 द्वारा प्रदत्त शक्तियों को प्रयोग में लाते हुए राज्य शासन द्वारा नगर पालिका परिषद में व्यक्तियों की भर्ती पारिश्रमिक और संविदा की अन्य शर्तों और विनियमितीकरण हेतु बाकायदा नियम बनाए हुए हैं। बावजूद इसके भी यदि सही तरीके से देखा जाए तो नगर परिषद कैलारस में अब तक हुई भर्तियों में शायद ही नियमों का पालन हुआ हो सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार मुख्य  नगर परिषद अधिकारियों द्वारा मनमाने तरीके से या दूसरे शब्दों में कहें तो चांदी की चकाचौंध के दम पर स्थापना व्यय से अत्याधिक भार सहित नगर परिषद में भर्तियां की गई है जो सरासर नियम विरुद्ध है।  यहां बता दें कि नियमानुसार भर्ती हेतु चयन एजेंसी, चयन समिति का निर्धारण होता है। और साथ ही पदों की संख्या का निर्धारण संबंधित नगरपालिका के लिए शासन द्वारा प्रदत आदर्श कार्मिक संरचना मैं निर्धारित संविदा के पदों पर संविदा की नियुक्ति की जा सकती है। शासन द्वारा निर्धारित संविदा विशेषज्ञ निकाय बार अधिकतम संख्या से अधिक पदों पर भर्ती नहीं की जा सकती ठीक उसी प्रकार सहायकों के पदों पर कार्य की आवश्यकता अनुसार संख्या के पदों का निर्धारण नियुक्ति प्राधिकारी द्वारा किया जा सकता है।            लेकिन  संविदा विशेषज्ञ के अधिकतम पदों पर नियुक्ति किए जाने की आवश्यकता होने पर आयुक्त नगरीय प्रशासन एवं विकास से प्रथक से अनुमति लेनी होती है। ठीक उसी प्रकार बाकायदा नियमानुसार नियुक्तियों के संबंध में राज्य स्तर के दो समाचार पत्रों में विज्ञापन प्रकाशन कराया जाना आवश्यक होता है। साथ ही साथ उक्त विज्ञापन को नगर परिषद के सूचना पटल पर भी लगाना अत्याधिक आवश्यक है। निर्धारित पदों के लिए आवश्यकता से अधिक आवेदन आने पर बाकायदा साक्षात्कार द्वारा भर्तियां की जा सकती हैं। उपरोक्त भर्तियों में स्थापना व्यय 65% के भीतर के  ही दायरे में ही भर्तियां हो सकती हैं। इसके अतिरिक्त किसी भी प्रकार की कोई भर्ती नियम अनुसार नहीं की जा सकती और उन पदों पर ही भर्ती की जा सकती है। जो विगत 6 महीने से रिक्त पड़े हुए हो जिसके लिए न्यूनतम आयु सीमा 21 वर्ष से 65 बरस तक निर्धारित की हुई है। साथ ही साथ नियुक्तियों के संबंध में विगत 3 वर्षों का स्थापना व्यय का आय-व्यय का ब्यौरा ,आय  -व्यय पत्रक सलंग्न कर बाकायदा प्रस्ताव संभागीय संयुक्त संचालक की ओर भेजा जाता है। नगर निगमों की स्थिति में आयुक्त की ओर भेजा जाता है। तब कहीं जाकर स्वीकृति उपरांत भर्तियां की जा सकती हैं। वह भी तब-जब चयन समिति की अनुशंसा हो लेकिन नगर परिषद कैलारस में सूत्रों अनुसार जानकारी रात हुई है के नगर परिषद में हुई भर्तियों के संबंध में पूर्णता नियमों का पालन नहीं किया गया है। ठीक उसी प्रकार विनियमितीकरण में भी नियमों को धता बता विनियमितीकरण कर दिया गया है। इससे साफ जाहिर होता है। कि नगर परिषद कैलारस इन दिनों बेलगाम बनी हुई है। यदि शासन द्वारा ठीक तरीके से जांच की जाए तो सच्चाई निकल कर सामने आ जाएगी । नगर परिषद में भर्तियों के संबंध में किसी भी प्रकार के नियमों का पालन नहीं किया गया है ऐसी चर्चा नगर में कहीं भी सुनी जा सकती है। अब देखना यह है क्या प्रशासन इस पर संज्ञान लेता है ।या यूं ही अपना हाथ जगन्नाथ  का भात और किसी की क्या बिसात की तर्ज पर यूं ही अवैध नियुक्तियां होती रहेंगी।      क्रमशः जारी=====@ नरेंद्र सिकरवार पत्रकार

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