-बोर्ड परीक्षा के नाम पर जारी किया तुगलकी फरमान, प्रशासन को झेलनी पड़ रही फजीहत
-2 सैंकड़ा के करीब शिक्षक किए चिन्हित, परीक्षा अधिनियम के विरुद्ध बताया जा रहा आदेश
भिण्ड। बोर्ड परीक्षाओं को नकल रहित संपन्न कराने के नाम पर प्रशासन व जिला शिक्षा विभाग ने तुगलकी फरमान जारी कर दिया है। इस फरमान के जारी होने के बाद कलेक्टर सतीश कुमार एस व जिला शिक्षा अधिकारी हरिभुवन सिंह तोमर की जमकर फजीहत हो रही है। दरअसल गुरूवार से हायर सेकेंडरी व हाई स्कूल की बोर्ड परीक्षाएं शुरू होने जा रही है और इससे पहले कलेक्टर के निर्देश पर जिला शिक्षा अधिकारी ने उन ट्यूशन पढ़ाने वाले शिक्षकों को चिन्हित कर परीक्षा के दिन थानों में ठूसने के आदेश जारी कर दिए हैं, जो अलग-अलग विषय के विशेषज्ञ टीचर माने जाते हैं। संभवत: प्रदेश में यह पहली बार है जब किसी जिले में परीक्षाओं के दौरान शिक्षकों को थानों में बिठाकर नजरबंद किया जाएगा। जबकि भिण्ड में बोर्ड परीक्षाओं के दौरान माफियाओं परीक्षा केंद्रों पर सामूहिक नकल कराने के लिए जाने जाते हैं, लेकिन प्रशासन ने माफियाओं सख्ती बरतने पर जोर न देकर शिक्षकों को नजरबंद करना जरूरी माना है।
यह दिया जा रहा तर्क
जिला शिक्षा अधिकारी श्री तोमर का कहना है कि इस बार अलग-अलग विषय के उन विशेषज्ञ शिक्षकों को थाने में बिठाकर नजरबंद किया जाएगा, जिस विषय की परीक्षा का आयोजन संबंधित तिथि को होना है। जिला शिक्षा अधिकारी का तर्क है कि इन विशेषज्ञ शिक्षकों को थाने में नजरबंद करने से सॉल्व किए गए प्रश्न के उत्तर परीक्षा केंद्र के भीतर नहीं जा सकेंगे और इससे नकल को रोक पाना संभव होगा। उन्होंने शिक्षकों को थाने में बिठाने की प्रक्रिया पर जानकारी देते हुए बताया कि जिस दिन गणित विषय की परीक्षा होगी तो उस दिन गणित के विशेषज्ञ शिक्षकों को थानों में नजरबंद कराएंगे और इसी तरह जिस-जिस विषय का एग्जाम आयोजित होगा उस तिथि को परीक्षा अवधि के दौरान उस-उस विषय के ट्यूशन पढ़ाने वाले टीचर को थानों में बिठाया जाएगा।
कलेक्टर ने मामले में साधी चुप्पी
परीक्षा के दौरान शिक्षकों को थानों में बिठाए जाने के आदेश जारी होने के बाद सोशल मीडिया पर जिला प्रशासन को जमकर ट्रॉल किया जा रहा है। सोशल मीडिया यूजर्स ने इस आदेश पर प्रतिक्रिया देते हुए यहां तक लिखा कि प्रशासन अपनी नाकामी छुपाने के लिए शिक्षकों पर ठीकरा फोड़ रहा है, जबकि भिण्ड में बच्चा-बच्चा जानता है कि जिले पर नकल का दाग माफिया के द्वारा लगाया गया है, जिन्हें नकल माफियाओं के नाम से जाना जाता है। इस मामले पर कलेक्टर की प्रतिक्रिया लेने के लिए कॉल लगाए गए, लेकिन उनका कॉल रिसीव नहीं हुआ। जिस पर चंबल कमिश्नर आशीष सक्सेना से बात की गई तो उन्होंने इस मामले पर कलेक्टर से बात करने की बात कही।
दो सैंकड़ा के करीब शिक्षक किए गए हैं चिन्हित
नकल रहित परीक्षा संपन्न कराने के नाम पर थानों में नजरबंद किए जाने वाले करीब 2 सैंकड़ा शिक्षकों को चिन्हित किया गया है। जिसमें 80 से 90 सरकारी शिक्षक और सैंकड़ा भर के करीब प्रायवेट टीचर हैं। यह वह शिक्षक हैं जो कोचिंग पढ़ाते हैं और इन्हें अपने-अपने विषय में विशेषज्ञ माना जाता है। अब इनके लिए आफत यह है कि परीक्षा तिथि के दिन परीक्षा के शुरू होने से समाप्त होने तक की अवधि के लिए थानों में बिठाया जाएगा, जबकि परीक्षा अधिनियम में इस तरह का कोई नियम नहीं है, फिर भी इस तरह का निर्णय लिया जाना प्रशासन की मनमानी माना जा रहा है और इस आदेश को तुगलकी फरमान का नाम दिया जा रहा है।
सभी सेंटरों को माना जा रहा संवेदनशील
17 फरवरी से बोर्ड परीक्षाएं शुरू होने जा रही है। इसके लिए हायर सेकेंडरी के परीक्षार्थियों के लिए 57 सेंटर बनाए गए हैं और हाई स्कूल के लिए 60 केंद्र निर्धारित किए गए हैं। इन सभी केंद्रों को कलेक्टर ने संवेदनशील बताया है। जिसमें 11 सेंटर अति संवेदनशील और 44 केंद्र संवेदनशील की श्रेृणी में रखे गए हैं। बात हायर सेकेंडरी व हाई स्कूल की बोर्ड परीक्षाओं में बैठने वाले परीक्षार्थियों की संख्या की करें तो हाई स्कूल में 24 हजार 164 परीक्षार्थी और हायर सेकेंडरी में 14 हजार 461 छात्र एग्जाम में बैठेंगे।
इनका कहना है:
नकल रहित परीक्षा संपन्न कराने के लिए विशेषज्ञ शिक्षकों को थानों में बिठाने का आदेश निकाला गया है। यह फैसला कलेक्टर साहब के निर्देश पर लिया गया है। माफियाओं व अन्य उपद्रवियों को रोकने के लिए परीक्षा केंद्र के 100 मीटर के दायरे में धारा 144 लागू की गई है।
-हरिभुवन सिंह तोमर, जिला शिक्षा अधिकारी भिण्ड।
मैं इस मामले पर कलेक्टर से बात करता हूं, क्या मामला है पता करने के बाद कुछ बोल पाउंगा।
-आशीष सक्सेना, चंबल कमिश्नर।

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