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👉लोगों को नहीं मिल रहा ईलाज*
👉जिला अस्पताल में भर्ती क्षमता से अधिक मरीज जमीन पर
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*संजय बेचैन न्यूज़ नेटवर्क शिवपुरी*
शिवपुरी वासियों को मेडिकल कालेज का लाभ नहीं मिल पा रहा यहां प्रबंधन पूरी तरह से अस्त व्यस्त दिखाई दे रहा है। यहां के डॉक्टर्स को सरकारी वेतन पर निजी अस्पतालों में तो सेवा देने या अपनी दुकानों पर समानान्तर सेवा का समय है मगर यहां इलाज के नाम पर तमाम मीनमेख निकालना समझ से परे है।
मेडिकल कॉलेज शुरू होने के साथ ही शहर को बड़े.बड़े सपने दिखाए गए थे। दावे किए गए थे कि मेडिकल कॉलेज खुलने के बाद रैफ र टू ग्वालियर का चलन बंद होगा यहीं शहरवासियों को बेहतर इलाज मिलेगा। मेडिकल कॉलेज तो शुरू हो गया लेकिन यहां के अस्पताल में व्यवस्थाएं शुरू होने पहले ही ध्वस्त दिखाई देने लगी हैं। यहां अभी तक ठीक से आइपीडी शुरू नहीं हो पाई है, जबकि नॉन सर्जिकल मरीजों को भर्ती करने के लिए अस्पताल शुरू हो चुका है। इसके बाद भी मेडिकल कॉलेज के 300 बिस्तर के अस्पताल में महज 30- 35 मरीज ही भर्ती हैं। इन दिनों मौसमी बीमारियों को प्रकोप फैला हुआ है। जिला अस्पताल में मरीजों की स्थिति यह है कि मरीज भर्ती करने के लिए बेड उपलब्ध नहीं है। मरीजों को जहां जगह मिल रही है वहां पर वे लेटकर अपना इलाज करा रहे हैं। किसी किसी बेड पर दो.दो मरीज लेटे हुए हैं। इतना ही नहीं जो अस्पताल का कॉमन एरिया है वहां पर भी अस्थाई रूप से पंलग डाले गए हैं। जिलों को अच्छे इलाज की उम्मीदों का बोझ इस मेडिकल कालेज अस्पताल पर है। इसके बाद भी यहां लोग यहां का रुख नहीं कर रहे क्योंकि कोरोना काल में यहां की लापरवाहियों का नतीजा वे देख चुके हैं। जिला अस्पताल से गंभीर मरीज को मेडिकल कॉलेज रैफ र किया जाता है। मेडिकल कॉलेज में सिर्फ शिवपुरी ही नहीं बल्कि श्योपुर गुना और अशोकनगर के मरीज भी यहां रैफ र होकर आने हैं। जिला अस्पताल से कई मरीज मेडिकल कॉलेज में रैफ र भी किए जाते हैं लेकिन यहां पर मरीज लेने से इंकार कर उन्हें लौटा दिया जाता है। पहले से ही बीमार व्यक्ति जिला अस्पताल और मेडिकल कॉलेज के बीच झूलता रहता है। इस बारे में मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल के प्रबंधन का तर्क है कि हम अभी रैफ र मरीज नहीं ले रहे हैं। जो मरीज ओपीडी में आएंगे और नॉनसर्जिकल परेशानी होगी उन्हें ही भर्ती किया जाएगा। यहां बता दें कि अप्रैल 2021 के पहले तक मेडिकल कॉलेज के चिकित्सक और स्टाफ जिला अस्पताल में अपनी सेवाएं देते थे। अप्रैल में दोनों विधिवत रूप से अलग हुए और मेडिकल कॉलेज ने स्टाफ वापस बुला लिया। चिकित्सक जिला अस्पताल से वापस चले गए इसके बाद कोरोना की दूसरी लहर में यहां पर करीब 140 बेड पर मरीज भर्ती करना शुरू किए गए। उस दौरान 400 से अधिक मरीज भर्ती हुए 100 का निधन हो गया। कुछ दिनों बाद ओपीडी शुरू हुई लेकिन आइपीडी के हाल ठीक नहीं हैं।

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