नायक कहिन : इस जंगल मे हम दो शेर , आखिर कब तक



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    *देवानंद नायक @9713989417*
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कहते हैं कि म्यान में तलवार एक ,कहानी में  नायक एक व जंगल मे शेर एक ही होते हैं किंतु ग्वालियर चम्बल की सियासत में भाजपारूपी जंगल मे अब केंद्रीय सियासत के दो शेर एक साथ है जिनमे अपने समर्थकों के बीच बॉस के नाम से जाने जाने वाले मुन्ना भैया यानी नरेद्र सिंह तोमर तो दूसरी तरफ महाराज यानी ज्योतिरादित्य सिंधिया  
कमलनाथ सरकार को गिरा कर कमल को सत्तासीन करवाने वाले  "महाराज" यानी ज्योतिरादित्य सिंधिया को भाजपा में इस समय खास महत्व दिया जा रहा है मामला चाहे संगठन का हो या सत्ता का सिंधिया व उनके समर्थकों का खास ख्याल रखा जा रहा है वही दूसरी तरफ नरेंद्र तोमर ने अपने समर्थक विधायक व मंत्री भारत सिंह कुशवाहा की नियुक्ति अपने लोकसभा क्षेत्र में करवा कर स्पष्ट संदेश दे दिया है कि वह अभी कमजोर नही पड़े हैं  किंतु  अब यह देखना है कि कितने दिनों तक यह दो शेर एक साथ एक जंगल मे  रह पाते हैं ग्वालियर चम्बल में अपने समर्थकों को लाभ दिलाने व अपने पैर पसारने में कामयाब हो पाते हैं दबी जवान से दोनों के समर्थक यह बात स्वीकारते हुए कहा कि एक जगह सत्ता के दो केंद्र होना टकराव का कारण तो बनेगे नरेंद्र तोमर राजनीति के मंझे हुए खिलाड़ी हैं वह सीधा टकराव नही करेंगे वही सिंधिया भी नरेंद्र तोमर से टकराकर भाजपा में सहज  नही रहेंगे अब यह देखने है कब तक एक शहर में दो केन्द्रीय मंत्री  निवास कर कितना विस्तार करते हैं और एक दूसरे के कार्य में कब तक टांग नही अड़ाते है यह भविष्य के गर्त में है 
अब अहम सवाल है तोमर को सिंधिया के साथ रहने का है क्या दोनों एक ही क्षेत्र में एक-दूसरे को सहयोग कर पाएंगे ?,क्या एक दूसरे के साथ मिलकर एक ही क्षेत्र में अपना दबदबा कायम रख पाएंगे? किंतु एक बात तय है ग्वालियर चंबल में बड़ी तादाद में फैले सिंघिया समर्थको को सत्ता में हिस्सेदारी और 2023 में टिकट को लेकर बड़ा टकराव देखने मिलेगा और अंत मे यही बात कहूंगा कि एक शेर कभी दूसरे के वर्चस्व को स्वीकार नही करता 
*"जीते वही तो शेर होते है*
*बांकी तो मिट्टी के ढेर होते हैं"*

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