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क्लब हाउस चैट में एक पाकिस्तानी पत्रकार के साथ कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह द्वारा कश्मीर से धारा ३७० को बहाल किये जाने वाली कथित टीप को लेकर भाजपा में उछल-कूद शुरू हो गयी है ,जबकि इस समय देश में विचारधाराओं और संविधान की धाराओं पर कोई विवाद है ही नही। असल विवाद तो ' धार ' को लेकर है। भाजपा नेताओं की तेज धार के मुकाबले में जो भी खड़ा होता है उसे देशद्रोही मान लिया जाता है ,फिर चाहे वे दिग्विजय सिंह हों या बंगाल की मुख्यमंत्री सुश्री ममता बनर्जी।
बात दिग्विजय सिंह की हो रही ह। वे अक्सर अपनी पार्टी लाइन से हटकर बात करते हैं और निर्भीकता के साथ करते है। उन्हें इस वजह से आये दिन अदालतों मने भी हाजरी देना पड़ती है लेकिन वे अपनी धार को मोथरा नहीं होने देते। वे जो बोलते हैं,बहुत सोचकर बोलते है। कांग्रेस में उनके अपने धुर विरोधी खुलेआम दिग्विजय सिंह को भाजपा का एजेंट बताते नहीं थकते ,लेकिन दिग्विजय सिंह की सेहत पर तो अभी तक कोई फर्क नहीं पड़ा है। भाजपा ही नहीं आरएसएस तक दिग्विजयी धार से घबड़ाती है।
हकीकत ये है कि कांग्रेस के पास भाजपा के शीर्ष नेता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री श्री अमितशाह की तरह धारदार बोलने वाले नेता कम ही है। कांग्रेस के पास पढ़े-लिखे नेताओं की कमी नहीं है लेकिन जिस भाषा में भाजपा बोलती है वैसी भाषा दिग्विजय सिंह और उन जैसे गिने-चुने नेता ही बोल पाते हैं। जैसा कि मैंने पहले ही कहा कि भाजपा की दिग्विजय सिंह के साथ लड़ाई विचारधार की है ही नही। लड़ाई धार की है। दिग्विजय सिंह यदि आज कांग्रेस छोड़ भाजपा में शामिल हो जाएँ तो भाजपा उन्हें सर माथे पर बैठा सकती है।
दिग्विजय सिंह की धारा ३७० वाली टीप को लेकर सबसे पहले बोलने वाले मप्र भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष बीड़ी शर्मा जी है। उन्होंने दिग्विजय के पाक कनेक्शन की जांच एनआईए से करने का आग्रह किया है। शर्मा जी की जितनी उम्र है दिग्विजय सिंह उतनी राजनीति कर चुके हैं ,इसलिए शर्मा जी की मांग पर हंसी आती है। कांग्रेस में भी उनके जैसे अनेक उतावले नेता हैं जो अतीत में और आजकल भी प्रधानमंत्री के पाक कनेक्शन की जांच करने की बचकानी मांग करते हैं। मप्र के मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने भी बीड़ी शर्मा के सुर में अपना सुर मिलाया है ,लेकिन वे ज्यादा जोर से इसलिए नहीं बोले क्योंकि वे दिग्विजय सिंह को अच्छी तरह जानते हैं।
दिग्विजय सिंह का दुर्भाग्य कहिये या सौभाग्य कि वे अपनी पार्टी कांग्रेस में तो खलनायक हैं ही साथ ही भाजपा में भी उन्हें खलनायक की तरह देखा जाता है। देश में जहाँ भी कांग्रेस का पराभव हुआ उसके लिए दिग्विजय सिंह को जिम्मेदार माना जाता ह। उनके ऊपर भाजपा से मप्र,गोवा और अन्य दुसरे प्रदेशों में भाजपा की सरकार बनवाने के लिए कांग्रेस से दगा करने के आरोप लगते रहे हैं बावजूद कांग्रेस ने उन्हें न पार्टी से निकाला और न जिम्मेदारियां देना बंद की। जाहिर है कि वे आज भी कांग्रेस के लिए एक जरूरी सामान है। जो दिग्विजय कर सकते हैं सो कांग्रेस के दुसरे कम ही नेता कर सकते हैं।
कश्मीर में कांग्रेस की सत्ता आने पर अनुच्छेद 370 की बहाली को लेकर दिग्विजय सिंह ने कुछ भी नया नहीं कहा है ,लेकिन जो कहा है वो ऐसे समय कहा है जब भाजपा की जमीन खिसक रही है । हाल ही में बंगाल में हारी भाजपा आने वाले दिनों में दूसरी विधानसभा चुनावों में हार की आशंकाओं से परेशान ह। ऐसे में दिग्विजय उवाच भाजपा के लिए किसी खतरे से कम नहीं हैं। जब संसद में अनुच्छेद 370 हटाने का प्रस्ताव आया था तब भी कांग्रेस इसके विरोध में थी और आज भी है। विरोध करना न देशद्रोह है और न राष्ट्रद्रोह । यदि होता तो मोदी सरकार अब तक श्रीमती सोनिया गांधी समेत तमाम कांग्रेसी नेताओं को जेल भेज चुकी होती।
कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटे दो साल होने को हैं लेकिन न न वहां के हालात बदले और न कोई कश्मीरी विस्थापित अपने पुराने ठिकाने पर पहुँच पाया। वहां आज भी लोग बन्दूक के साये में हैं। राज्य के नेताओं को एक तरह से नजरबंद कर रखा गया है। चुनाव करने का साहस सरकार कर नहीं पा रही है। कश्मीर के तीन टुकड़े करने से भी मसले का कोई हल नहीं निकला। भाजपा का कश्मीर को लेकर जो नजरिया है ,उससे आप सहमत या असहमत हो सकते हैं। दिग्विजय सिंह भी इस फैसले से असहमत हैं और उनकी पार्टी भी। लेकिन भाजपा को दो साल बाद भी अपने फैसले की नाकामी पर कोई टीप मंजूर नहीं है। कोई यदि इस बारे में बोलता है तो भाजपा को लगता है कि बोलने वाला पकिस्तान की जुबान बोल रहा है। ये ठीक बात नहीं है।
भाजपा को कश्मीर के मुद्दे पर घेरने वाले कांग्रेस के दो युवा नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया और जीतें प्रसाद भाजपा में शामिल हो चुके है। सचिन पायलट अभी खुलकर बोल नहीं रहे हैं,भाजपा के लिए ये सुविधाजनक स्थिति है लेकिन ऐसे में दिग्विजय सिंह का बोलना भाजपा नेताओं को कांटे की तरह चुभ गया है। बीते सात साल में भाजपा नेतृत्व ने साम,दाम,दंड और भेद के जरिये कांग्रेस समेत दूसरी दलों के तमाम नेताओं को नाथ लिया है लेकिन दिग्विजय सिंह भाजपा के काबू में नहीं आ रहे हैं। उन्हें न सरकार का तोता भयभीत कर पाया है और न मैना। वे एनआईए से भी शायद नहीं डरते ,लेकिन उन्हें डराने की कोशिशें जारी हैं।
आज के स्नकर्मंणकाल में दिग्विजय जैसे स्वरों की बहुत जरूरत है ,फिर भले ही वे किसी भी पार्टी के हो। तृणमूल कांग्रेस के पास एक स्वर है जो भाजपा को भयभीत करता ह। बसपा और सपा को भाजोआ ने फिलहाल दबाकर रखा हुआ है। वामपंथी सत्ता से फिलहाल बहुत दूर हैं इसलिए भाजपा के लिए कोई चुनौती नहीं हैं ,लेकिन कांग्रेस और कांग्रेस से निकले दूसरी नेता भाजपा के लिए कल भी चुनौती थे और आज भी हैं। अब देखना होगा कि भाजपा दिग्विजयी धार से अपने आपको बचा पाती है या नहीं ?क्योंकि लड़ाई विचारधारों की नहीं धार की है।
@ राकेश अचल वरिष्ठ पत्रकार

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