इस ' महाभारत ' के असल जिम्मेदार

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भारत में बिना किसी जंग के हो रही 'महाभारत ' यानि एक महामारी से रोजाना बेमौत मारे जा रहे  लोगों की जिम्मेदारी आखिर किसी के सर तो जाएगी ही.यमराज इसके लिए जिम्मेदार नहीं हैं ,आप और हम भी नहीं,क्योंकि आपके और हमारे हाथ में सिवाय एक 'अमूल्य ' वोट के कुछ है नहीं .इसके लिए जिम्मेदार केवल और केवल हमारे माननीय प्र्धानमंत्री हैं .ये बात जब हम जैसे नामालूम पत्रकार कहते हैं तो उन्हें देशद्रोही और शहरी नक्सल तक कह दिया जाता है किन्तु जब यही बात दुनिया का एक प्रतिष्ठित शोध प्रकाशन कहता है तो भक्तों के मुंह पर ताले पड़ जाते हैं .
राजनीति से कोसों दूर रहने वाले द इंस्टीट्यूट फॉर हेल्थ मेट्रिक्स एंड इवैल्यूएशन के प्रकाशन ' दी लेसेन्ट' के  संपादकीय में प्रधानमंत्री नरेद्र मोदी की कार्यशैली पर तल्ख टिप्पणी की है। जर्नल ने लिखा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के काम माफी लायक नहीं हैं, उन्हें पिछले साल कोरोना महामारी के सफल नियंत्रण के बाद दूसरी लहर से निपटने में हुई अपनी गलतियों की जिम्मेदारी लेनी चाहिए।
चूंकि ये जर्नल फुटपाथों पर नहीं बिकता इसलिए इसमें लिखी बात असंख्य भारतीयों तक शायद न पहुंचती हो किन्तु वहां जरूर पहुंचती है जहाँ इसे पहुंचना चाहिए .' दी लेसेन्ट ' लिखता है कि भारत में इस साल 1 अगस्त तक कोरोना महामारी से 10 लाख लोगों की मौत हो जाएगी। अगर ऐसा हुआ तो मोदी सरकार इस राष्ट्रीय तबाही के लिए जिम्मेदार होगी। क्योंकि, कोरोना के सुपर स्प्रेडर के नुकसान के बारे में चेतावनी के बावजूद सरकार ने धार्मिक आयोजनों को अनुमति दी, साथ ही कई राज्यों में चुनावी रैलियां कीं।यही सब बातें हमने भी कहीं थीं ,लेकिन उन्हें राजनीति समझा गया .
जर्नल ने लिखा कि मोदी सरकार कोरोना महामारी को नियंत्रित करने के बजाय ट्विटर पर हो रही आलोचनाओं और खुली बहस को हटाने में ज्यादा जोर लगा रही है। जर्नल ने भारत सरकार की वैक्सीन पॉलिसी की भी आलोचना की है। उसने लिखा कि सरकार ने राज्यों के साथ नीति में बदलाव पर चर्चा किए बिना अचानक बदलाव किया और 2% से कम जनसंख्या का टीकाकरण करने में ही कामयाब रही।
 भारत के हेल्थ सिस्टम पर भी सवाल खड़े करते हुए  ' दी लेसेन्ट '  ने जोर देकर  लिखा कि अस्पतालों में मरीजों को ऑक्सीजन नहीं मिल रही है, वे दम तोड़ रहे हैं। मेडिकल टीम भी थक गई है, वे संक्रमित हो रहे हैं। सोशल मीडिया पर व्यवस्था से परेशान लोग मेडिकल ऑक्सीजन, बेड, वेंटिलेटर और जरूरी दवाइयों की मांग कर रहे हैं.दी लेसेन्ट के मुताबिक भारत के स्वास्थ्य मंत्री
डॉ. हर्षवर्धन मार्च के पहले ऐलान करते रहे हैं कि अब महामारी खत्म होने को है। केंद्र सरकार ने बेहतर मैनेजमेंट के साथ कोरोना को हराने में सफलता प्राप्त की है। लेकिन दूसरी लहर की बार-बार चेतावनी के बावजूद भी सरकार नहीं चेती।
कोरोना से जुड़े तमाम सवाल जो हमने समय-समय पर उठाये थे उन्हें ही ' दी लेसेन्ट ' ने भी उठाया है. उसने कहा है कि-'सरकार ने पिछले साल कोरोना के शुरूआती दौर में महामारी को नियंत्रित करने में बेहतरीन काम किया था, लेकिन दूसरे वेव में सरकार ने बड़ी गलतियां की हैं। महामारी के बढ़ते संकट के बीच सरकार को एक बार फिर जिम्मेदारी और पारदर्शिता के साथ काम करना चाहिए। संपादकीय में केंद्र सरकार को दो तरफा रणनीति पर काम करने का सुझाव दिया गया है। पहला- भारत को वैक्सीनेशन प्रोग्राम बेहतर ढंग से लागू करना चाहिए और इसे तेजी के साथ बढ़ाने पर काम हो। दूसरा- सरकार जनता को सही आंकड़े और जानकारियां मुहैया करवाए।
भारत में अब तक कोरोना 242398  लोगों की जान ले चुका है. यहां हर चौबीस घंटे में चार लाख से ज्यादा नए मरीज निकल रहे हैं और 4  हजार   से अधिक लोग रोज मारे जा रहे हैं ,फिर भी हालत काबू में नहीं  आ रहे .बावजूद न हमारी सरकार इस मसले पर कोई सर्वदलीय बैठक बुला रही है और न जनता के समाने हकीकत रख रही है .दी लेसेन्ट में अपने आरोपों की पुष्टि के बाद भी हम प्र्धानमंत्री नरेंद्र मोदी से इस्तीफा देने की मांग नहीं करते.हमें नहीं चाहिए इस्तीफा,आप चस्पा करके रखिये अपने आपको सत्ता से लेकिन भगवान के लिए कम से कम इस महाभारत को रोकने के लिए सबको साथ लेकर चलिए,राजनीति बंद कीजिये .कोरोना वेक्सीन के पेटेंट को लेकर अपीलों से कुछ हासिल नहीं होने वाला .अपना इंतजाम आप कीजिये, स्वास्थ्य सेवाओं को सम्पूर्ण प्राथमिकता दीजिये.फालतू के ताजमहल बनाने का काम फौरन बंद  कीजिये .
मोदी जी कोरोनाकाल में एक बँगला देश को चूड किसी दुसरे देश की यात्रा पर नहीं गए लेकिन इस बीच उन्होंने अपना समय देश की स्वास्थ्य सेवाओं का उन्ननयन करने में खर्च करने के बजाय बंगाल जीतने की रणनीति पर ज्यादा खर्च किया .वे न बंगाल जीते और न केरल बल्कि इस जुए में देश को हर बैठे .समय अब भी है उनके पास अपनी गलतियां सुधरने के लिए .लेकिन उनका दम्भ उन्हें ऐसा करने देगा इसमें अभी भी संदेह है .
राहत की बात ये है कि डीआरडीओ द्वारा विकसित 2 - DG  दवा सामने आयी है .इसके बारे में जैसे दावे किये जा रहे हैं यदि वे सही साबित हुए तो इस महाभारत में इस महत्वपूर्ण संस्थान की जय बोलना जरूरी हो जाएगा. डीआरडीओ का सौभाग्य है कि उसे अन्य नवरत्नों की तरह अभी तक बेचा नहीं गया है .भगवान करे कि डीआरडीओ कि मेहनत रंग लाये .क्योंकि कोरोना महामारी को अवसर समझकर 'कोरोनिल'लाने वाले तो  सिवाय जनता को लूटने के और कुछ कर नहीं सके.आजकल उनका कोई आता-पता भी नहीं है .
@ राकेश अचल

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