*26 मई को किसान मजदूरों के साथ साथ जनवादी पत्रकार भी मनाएंगे काला दिवस* =============आज भारत की जनता को मोदी 2.0 और कोविड की दूसरी विनाशकारी लहर से बचाने की चुनौती हमारे सामने है। देश में कोविड से जान गँवाने वाले लोगों का आँकड़ा अब तीन लाख से पार जा चुका है। पिछले दो महीनों में मौत के आँकड़े दोगुना बढ़े हैं। अब तो पूरी दुनिया में जितनी मौतें कोविड से रोज हो रही हैं, भारत में रोज संभवत: उससे ज़्यादा लोग कोविड से मारे जा रहे हैं। ये आँकड़ा तब है जबकि मौत के आँकड़े ठीक से नहीं बताए जा रहे हैं। कोविड की दूसरी संघातक लहर में देश में लाखों लाख लोग काल कलवित हुए उसमें हमने भी देश भर में अपने कई पत्रकार साथियों को खोया है महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश ,राजस्थान गुजरात, बिहार सहित देश में भाई इस विनाशकारी लहर से हमारे कई पत्रकार साथी आज हमारे बीच नहीं है। चूंकि हम पत्रकार हैं सो हमारी जवाबदारी दोहरी हो जाती है इस दोहरी जवाबदारी के निर्वहन के लिए हमें अपनी लेखनी के माध्यम से प्रतिरोध दर्ज कराते हुए सत्ता की कमियों को लोगों के बीच लाना है। हमने आपने सभी ने देखा के जहां उत्तर प्रदेश में गंगा में बहती और नदियों के किनारे रेत में गड़ी लाशें दिख रही हैं। ! सरकारी मौत के आंकड़ों को छुपा रही हैं अगर सही आँकड़ा सरकारी आँकड़े का पंद्रह गुना भी माने तो शायद हम अब तक तक़रीबन पचास लाख लोगों को खो चुके हैं। यह संख्या हर साल मरने वाले लोगों की संख्या की आधी है।
2020 की शुरुआत से ही पूरी दुनिया इस प्राणघाती कोविड महामारी से लड़ने के लिए प्रभावी वैक्सीन का इंतजार कर रही थी। 2020 के आखिर तक वैक्सीन आ गयी और ताकतवर देशों ने उसी दौर में वैक्सीन के अंतर्राष्ट्रीय उत्पादन और आपूर्ति का बड़ा हिस्सा हथिया लिया। आज दुनिया वैक्सीन संबंधी गैर-बराबरी व अन्याय के तले पिस रही है। देश को दुनिया का दवाखाना बताने वाली मोदी सरकार ने वैक्सीन संबंधी इस गैर-बराबरी से लड़ने के लिए कुछ नहीं किया। युद्ध-स्तर पर देश के हर नागरिक को वैक्सीन मिल जाए, उतनी वैक्सीन बनाने या हासिल करने के लिए सरकार ने कुछ नहीं किया। 'आत्मनिर्भर भारत' का नारा जुमला ही निकला। नतीजा यह है कि आज भारत के सिर्फ तीन फीसदी लोगों को ही वैक्सीन की दोनों डोज लग सकी है। हम भारत में राज्य द्वारा थोपा गया कोविड जनसंहार देख रहे हैं। इस जनसंहार के खिलाफ ताकतवर प्रतिरोध के के रूप में हमें भी अपनी लेखनी के माध्यम से सत्ता पक्ष की कमियों को उजागर करना होगा यदि समय रहते सत्तापक्ष ने कोविड की बीमारी को एक गंभीर चुनौती के रूप में लिया होता तो शायद आज देश में मृत्यु दर इतनी अत्याधिक ना होती
वहीं दूसरी तरफ जैसा कि हम और आप सभी को विदित है 26 नवंबर 2020 से 550 से ज्यादा किसान संगठनों के संयुक्त किसान मोर्चा एवं अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति के नेतृत्व में दिल्ली की सभी सीमाओं पर विगत 6 महीने से आंदोलन चलाया जा रहा है किसान विरोधी तीनों कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों में अध्यादेश के समय से ही आक्रोश था जिसको लेकर किसानों ने अपनी बात रखने के लिए शांतिपूर्ण तरीके से अपना आंदोलन प्रारंभ किया जो विगत 6 महीने से जारी है जिसमें करीब 3 सैकड़ा किसानों ने अपनी जान भी गंवा दी।इस दौर में हम खेती को कॉरपोरेट नियंत्रण से बचाने के लिए चल रहे ऐतिहासिक किसान आंदोलन के गवाह हैं। 26 मई 2021 को दिल्ली की सीमाओं पर किसानों के अनिश्चितकालीन धरने के छः महीने पूरे हो गए। एक तरफ किसान, मोदी सरकार के विनाशकारी कृषि कानूनों को हटवाने के लिए लड़ रहे हैं, दूसरी तरफ मजदूर, निजीकरण के साथ-साथ मजदूर वर्ग के अधिकारों को हड़पने वाली, उन्हें कॉरपोरेट गुलामी में जकड़ने वाले कानून लाने वाली मोदी सरकार से लड़ाई लड़ रहे हैं। भारत के युवाओं और अगली कतार में हम पत्रकारों को भी किसान मजदूरों के साथ एकता दिखा कर लड़ना होगा।लड़ने वाले योद्धाओं- डॉक्टरों, पत्रकारों, नर्सों, स्वास्थ्य कर्मचारियों, ड्राइवरों, सफाईकर्मियों के लिए आज के भारत में सिर्फ और सिर्फ अनिश्चय और अन्याय है। जब पूरा देश ऑक्सीजन और साफ हवा के लिए छटपटा रहा है तब संघ-भाजपा के हिन्दू राष्ट्र का प्रोजेक्ट हमारे मुल्क का गला घोंटने की कोशिशों में लगा हुआ है। एक बार फिर अवाम का बड़े पैमाने पर मोहभंग हो रहा है, व्यापक लोकप्रियप्रतिरोध आंदोलन की स्थितियां परिपक्व हो रही हैं जिंदगी और मौत के बीच की इस लड़ाई में सांप्रदायिक फासीवादी कंपनी राज और जनता के जनवादी भारत के बीच की लड़ाई में हम पत्रकारों को भी अपनी भूमिका का निर्वहन करना होगा , 26 मई को होने वाले आंदोलन कि हमारी मुख्य मांगे- *सभी मीडिया संस्थान से जुड़े प्रतिनिधियों को कोरोना वॉरियर्स घोषित करो, कोरोना से मृत हुए पत्रकारों के परिवारी जनों को उचित आर्थिक सहायता प्रदान करो, सभी मीडिया संस्थानों से जुड़े प्रतिनिधियों को मुफ्त में कोविड वैक्सीन लगाई जाए, मजदूरों के ऊपर जबरन लादे गए 44 श्रम कानूनों को निरस्त करो, साथ ही साथ देश की खेती किसानी बचाने के लिए तीनों कृषक बिल अभिलंब रद्द करो* की मांग को लेकर आप सभी पत्रकार साथियों से मैं यह अपील करता हूं कि आइए राष्ट्र को बचाने की लड़ाई में आवाम को बचाने की लड़ाई में हम भी अपनी सहभागिता दिखाएं।============@नरेंद्र सिकरवार

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