कोरोना : मामा सरकार की आंकड़ेबाजी

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वैश्विक महामारी में पूरी दुनिया और देश के साथ मध्यप्रदेश ने भी बहुत कुछ गंवाया .कोरोना की दूसरी लहर में केंद्र की तरह मध्यप्रदेश की मामा सरकार भी नाकाम साबित हुयी लेकिन जब मामा सरकार ने मोर्चा सम्हाला तब हालात में कुछ तब्दीली नजर आने लगी है.अब ये मोर्चाबंदी कितनी कारगर साबित होगी आने वाले दिन बताएँगे .
भारत में कोरोना प्रकोप के मामले में मध्यप्रदेश 12  वे स्थान पर है. प्रदेश में 7 ,08 ,621  लोग अब तक कोरोना से संक्रमित हुए हैं .िनमने 5 ,93 ,752  लोग ठीक भी हुए हैं लेकिन दवाओं की कमी ,आक्सीजन का अभाव और बदनसीबी के चलते प्रदेश में 6753  लोगों को बचाया नहीं जा सका.ये आंकड़े हैं ,हकीकत इससे अलग है लेकिन हकीकत कभी आंकड़ों से मेल नहीं खाती .आज भी प्रदेश में रोजाना 6  हजार से अधिक मरीज रोजाना सामने आ रहे हैं और संक्रमण के शिकार कोई सौ-डेढ़ सौ लोग रोज मारे जा रहे हैं .
कोरोना के प्रकोप को देखते हुए मध्यप्रदेश में सरकार ने हाल ही में मैदानी स्तर पर महामारी की रोकथाम की उचित व्यवस्था एवं प्रबंधन के लिये प्रत्येक जिला कलेक्टर को दो करोड़ रुपये अनाबद्ध राशि के मान से 104 करोड़ रुपये का आवंटन देने का अनुसमर्थन किया गया। इसमें भोजन एवं कपड़े सहित पुनर्वास शिविरों की व्यवस्थाएँ, मेडिकल शिविरों (क्वारेंटाइन शिविरों) के संचालन, शिविरों का पर्यवेक्षण, आवश्यक कार्यों में तैनात कर्मचारियों की सुरक्षा, साफ-सफाई व्यय आदि के लिए वित्तीय वर्ष 2021-22 में कोविड-19 की रोकथाम के लिये किये जाने वाले विभिन्न कार्यों एवं आवश्यक उपकरण क्रय करना आदि शामिल है।ये इंतजाम हालांकि ' ऊँट के मुंह में जीरे' जैसा है किन्तु न कुछ से तो बहुत कुछ है ही .
संकट के समय चौहान ने अपने घर में पौधे रोपने   के साथ ही कोरोना से जूझने का प्रयास भी किया.चौहान ने कहा है कि जिन कोरोना मरीजों को ठीक होने के बाद पोस्ट कोविड केयर की आवश्यकता है, उनका देखभाल कोविड केयर सेंटर में की जाए। इन सेंटर्स पर डॉक्टर की सलाह अनुसार ऐसे व्यक्तियों को आवश्यक उपचार उपलब्ध कराया जाएगा। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि ब्लेक फंगस के बढ़ते मामलों को देखते हुए आवश्यक व्यवस्थाएँ स्थापित की जा रही हैं। इस बीमारी के लिए उपयोगी दवा की कालाबाजारी और जमाखोरी को रोकने के लिए जिला प्रशासन सतर्क रहे
मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री से लेकर मुख्य सचिव चूंकि कोरोना के शिकार खुद हो चुके हैं शायद इसीलिए वे इस महामारी के जख्मों की पीड़ा समझ पाए हैं .सरकार द्वारा किये जा रहे इंतजामों में इसकी झलक दिखाई दे रही है .प्रदेश में '  किल कोरोना ' अभियान का भी पूरी गंभीरता से संचालन किया जा रहा है । सरकार का दावा है की  25 हजार 433 कोविड मरीजों का नि:शुल्क इलाज किया जा रहा है। इनमें से शासकीय अस्पतालों में 19 हजार 901, अनुबंध निजी अस्पतालों में 2602 तथा मुख्यमंत्री कोविड उपचार योजना के अंतर्गत 2930 मरीज नि:शुल्क उपचार प्राप्त कर रहे हैं। होम आयसोलेशन में रह रहे 95.3 फीसदी  लोग निरंतर सम्पर्क में हैं। अब तक शहरी क्षेत्रों में 2 लाख 49 हजार 607 लोगों को और ग्रामीण क्षेत्रों में 73 हजार 744 लोगों को मेडिकल किट वितरित की जा चुकी हैं।
सरकार की कथित मोर्चाबंदी के कारण प्रदेश में कोरोना संक्रमण की चेन को तोड़ने और उपचार की बेहतर व्यवस्थाओं के लिये किये जा रहे चहुँमुखी प्रयासों से कोरोना की पॉजिटिविटी दर लगातार कम हो रही है और रिकवरी दर में वृद्धि हो रही है। प्रदेश का पॉजिटिविटी रेट घटकर 11.83 प्रतिशत और रिकवरी रेट 84.47 प्रतिशत हो गया है। पिछले एक माह में प्रतिदिन किये जा रहे टेस्टिंग की संख्या में तेजी से बढ़ोत्तरी की जा रही है। वर्तमान में 65 हजार से अधिक टेस्ट किये जा रहे हैं। 
कोरोना ने आम जनता के साथ-साथ सरकार से भी बहुत से लोग छिनैहैं. मंत्री,विधायक और संगठन के तमाम महत्वपूर्ण लोग इस बीच अकाल मौत के शिकार हुए .कोई भरपूर इलाज के बावजूद नहीं बचा तो किसी को इलाज के दौरान या तो आक्सीजन नहीं मिली या फिर इंजेक्शन,किसी किसी को तो अस्पताल में बिस्तर ही नहीं मिला ,फिर भी सरकार का दावा है कि प्रदेश के 52 जिलों में 354 कोविड केयर सेंटर्स प्रारंभ किये जा चुके हैं, जिनमें मंद लक्षणों वाले रोगियों का इलाज किया जा रहा है। इनमें वर्तमान में कुल 21 हजार 988 आइसोलेशन बेड्स और 3231 ऑक्सीजन बेड्स स्थापित किये गए हैं। 
इसी प्रकार प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में अब तक कुल 22 हजार 404 से अधिक संस्थागत क्वारेंटाइन सेंटर्स बनाये जा चुके हैं, जिनमें लगभग 2 लाख 69 हजार 309 से अधिक बेड्स स्थापित किये गए हैं। शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में स्थापित सभी कोविड केयर सेंटर्स/ संस्थागत क्वारेंटाइन सेंटर्स में रहने वाले शत प्रतिशत मरीजों को मेडिकल किट और हेल्थ ब्रोशर प्रदान किये जा रहे हैं।
प्रदेश में सरकारी क्षेत्र में 315 और निजी क्षेत्र में 530, इस प्रकार कुल 845 कोविड अस्पताल वर्तमान में संचालित हो रहे हैं। एक अप्रैल को प्रदेश में उपलब्ध बेड्स की कुल संख्या 20 हजार 159 थी, जो आज बढ़कर 68 हजार 692 हो गई है। पिछले एक माह में कुल 45 हजार से अधिक बेड्स बढ़ाए गए हैं। प्रदेश में '  किल कोरोना ' अभियान-3 का संचालन 7 मई से किया जा रहा है। अभियान में ग्रामीण क्षेत्र के सर्वे के लिये लक्षित जनसंख्या लगभग 6 करोड़ 26 लाख है।
योजनाएं बनाने में सिद्ध हस्त मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने प्रदेश में मुख्यमंत्री कोविड उपचार योजना लागू कर दी.इस योजना  में प्रदेश के शासकीय अस्पतालों और कोविड केयर सेन्टर में प्रदेश का कोई भी नागरिक भर्ती होकर निःशुल्क इलाज करा सकता हैं। इस कम्पोनेन्ट के तहत  13 मई की स्थिति में 21 हजार 783 मरीज उपचाररत हैं। प्रदेश के चार जिलों इन्दौर, भोपाल, देवास और उज्जैन के प्राइवेट चिकित्सा महाविद्यालय के अस्पतालों में अनुबंधित बिस्तरों पर प्रदेश का कोई भी व्यक्ति भर्ती होकर निःशुल्क उपचार करा सकता हैं। इस कम्पोनेन्ट के तहत 2887 मरीज उपचाररत् हैं। आयुष्मान से सम्बद्ध समस्त अस्पतालों में आयुष्मान कार्ड की पात्रता रखने वाले परिवार के सभी सदस्यों का निःशुल्क उपचार किया जा रहा हैं। इस कम्पोनेन्ट के तहत 2280 मरीज उपचाररत् हैं।
सरकार का दावा है कि कोविड-19 उपचार करने वाले 603 निजी चिकित्सालयों में से 188 निजी चिकित्सालय आयुष्मान योजना में पूर्व से संबद्ध हैं। निजी चिकित्सालयों के आयुष्मान से सम्बंध होने के 333 आवेदन प्राप्त हो चुके हैं, जिसमें से 231 को सम्बद्ध किया जा चुका हैं।कोरोना का संकट टले या न टले किन्तु सरकार ने प्रदेश के 313 विकासखण्डों में से 253 में विकासखण्ड स्तरीय संकट प्रबंधन समूह एवं 46 हजार 266 ग्रामों में से 38 हजार 934 ग्रामों में ग्राम संकट प्रबंधन समूह का गठन किया जा चुका है। शहरी क्षेत्र में 407 स्थानीय निकायों के 7,568 वार्ड में से 6,646 में वार्ड स्तरीय संकट प्रबंधन समूह गठन किये जा चुके है।
कोरोना के टीकाकरण अभियान में मध्यप्रदेश भी दुसरे राज्यों की तरह १८ वर्ष की आयु के लोगों को घोषणा के बावजूद टीका नहीं दे सका.पहली खुराक ले चुके लोगों को भी दूसरी खुराक समय से नहीं मिली,हालांकि प्रदेश में ' डबल इंजिन 'वाली सरकार है मध्यप्रदेश में जब लगभग एक दर्जन पत्रकार कोरोना की भेंट चढ़ गए तब सरकार ने पत्रकारों के लिए निशुल्क इलाज की व्यवस्था के साथ ही पत्रकारों को कोरोना का सिपाही माना .कोरोना से अनाथ हुए परिवारों के लिए पांच हजार रूपये महीने की पेंशन देने की घोषणा भी की .सरकार की तमाम घोषणाएं मरहम जैसी हैं ,इनका असर बाद में सामने आएगा .
@ राकेश अचल वरिष्ठ पत्रकार

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