’’मैं कोरोना वॉलिंटियर अभियान’’ के सच्चे प्रहरी हैं रणवीर’’...
जिला मुख्यालय से लगभग 80 किलो मीटर की दूरी पर एक गांव आता है चड़रौआ। लहार विकास खण्ड के अंतर्गत लगभग 800 की आबादी वाले इस गांव के निवासी हैं रणवीर सिंह कौरव। लगभग 40 बसंत देख चुके रणवीर सिंह कौरव का मुख्य कार्य कृषि करना है। लेकिन उनके अंदर समाज सेवा करने की एक अलग ही लगन थी और वे हमेशा सोचते कि कुछ ना कुछ ऐसा काम किया जाये जिससे गांव के साथ साथ बाहर भी एक पहचान मिले। यही लगन का भाव उन्हें सन 2017 में जन अभियान परिषद के विकास खण्ड समन्वयक सुनील चतुर्वेदी जी के पास ले गया सुनील चतुर्वेदी ने उनकी एक प्रस्फुटन समिति का निर्माण कराया जिसमें वह अध्यक्ष श्री गंगा सिंह के साथ सचिव बने। इसके बाद से उनके अंदर समाज सेवा करने का जो भाव अंतर्मुखी था और वह बहिर्मुखी हुआ और समाज सेवा की ललक जाग उठी। चाहे एकात्म यात्रा हो चाहे ग्राम के अंदर नशा मुक्ति, ऊर्जा संरक्षण, जल संरक्षण या कोई भी सामाजिक सेवा के अंतर्गत आने वाला कार्य इसको लेकर जन जागरूकता का शंखनाद किया रणवीर ने। आज वे पहचान को मोहताज नहीं। आसपास के ग्रामों में रणवीर को समाजसेवी के रूप में जो ख्याति मिली उसे वे खुले कंठ से जन अभियान परिषद से जुड़ना मानते हैं।
कोरोना जैसी महामारी मैं एक तरफ लोग जब बाहर निकलने से कतराते हैं घरों में रहने में ही अपनी भलाई समझते हैं तब रणवीर एक महा योद्धा की तरह न केवल बाहर निकलते हैं बल्कि कोरोना को लेकर लोगों को जागरूक भी करते हैं। बकौल रणवीर जैसे ही उनको पता लगा की मैं कोरोना वालिंटियर अभियान के अंतर्गत पंजीयन हो रहा है वैसे ही उन्होंने विकास खण्ड समन्वयक को फोन करके न केवल पंजीयन कराया बल्कि अपने साथ साथ 20 से अधिक लोगों का भी पंजीयन कराया और अब वे मैं कोरोना वॉलियंटर बनकर विकास खण्ड में अग्रणी समाजसेवक के रूप में अपनी भूमिका निभा रहे हैं उनके द्वारा अब तक ’200’ से अधिक लोगों को मास्क बांटे गए हैं व सोशल डिस्टेंसिंग बनाने के लिए कहा गया है। ’15’ से अधिक स्थानों पर दीवार लेखन करा दिया गया है। ’300’ से अधिक लोगों को वैक्सीनेशन के लिए प्रेरित किया गया। ’20’ से अधिक लोगों को स्वयं ले जाकर व्यक्ति का वैक्सीनेशन कराया है और इतना ही नहीं जो भी उन्हें मिलता है उसको मास्क लगाने के लिए जागरूक करते हैं एवं अपील करते हैं कि इस महामारी में अधिक से अधिक कोशिश करें घर में ही रहें। उनकी समाज सेवा का यह कारवां यहीं नहीं रुका वे निरंतर अभी कार्य कर रहे हैं।
वे सही मायने में करुणा योद्धा बनकर उभरे हैं। वह मैं कोरोना वॉलिंटियर्स अभियान की लहार विकास खण्ड की अनुपम धरोहर हैं। इतना ही नहीं उन्होंने एक सक्रिय लोगों की टीम बनाई है जिसके माध्यम से वे आसपास के गांव ’बरथरा, बड़ागांव, गोरा, छोटा मजरा, शाहपुरा नंबर दो’ और ’दबोह’ आदि तक वे यह नजर रखते हैं कि कौन व्यक्ति बाहर से आया है और उसकी स्थिति क्या है।
यह सेवा भाव रणवीर को एक सच्चा समाज सेवक बनाता है। जब उनसे उनके सपने के बारे में पूछा जाता है तो वे कहते हैं कि जन अभियान परिषद ने उन्हें न केवल पहचान दी है बल्कि समाज सेवा करने का सही रास्ता भी दिखाया है। सच कहूं तो मैं कोरोना वॉलियंटर अभियान ने तो उनको एक नई ऊर्जा दे दी है। वह आभारी हैं इस माध्यम से अधिक से अधिक लोगों की सेवा करने का अवसर मिल रहा है। उनका कहना है कि गांव में जो स्कूल है वह आठवीं से लेकर 10वीं तक हो जाए एक उप स्वास्थ्य केंद्र बन जाए एवं अधिक से अधिक लोग शिक्षित हो जायें तो उनकी समाज सेवा का प्रतिफल उनको मिल जाएगा। इसके लिए भी निरंतर प्रयासरत भी रहते हैं। मैं कोरोना वॉलियंटर अभियान में वे अपने गांव की धुरी बनकर काम कर रहे हैं। कहना गलत ना होगा कि कोरोना के विरुद्ध युद्ध में रणवीर सच्चे वीर हैं। अपने इस काम का श्रेय अपने विकास खण्ड समन्वयक सुनील चतुर्वेदी को देना नहीं भूलते उनका कहना है कि सही मायने में जन अभियान परिषद ने उन्हें तराश दिया है और अब समाज सेवा के अलावा कोई और सबसे अच्छी सेवा दिखती ही नहीं है। 10 साल की बच्ची के पिता रणवीर का सपना है कि उनकी बिटिया भी अपना नाम समाज सेवा के रूप में करे। सही मायने में कोरोना वॉलियंटर अभियान के सच्चे सिपाही हैं।
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