देवानंद नायक @9713989417
आज देश के समाने कोरोना महामारी बड़ी समस्या के रूप में खड़ी है इससे लड़ने में सारा देश व्यस्त है उधर एक और मुसीबत दबे पांव आ गयी है वह ख़राब अर्थव्यवस्था ! कोरोना महामारी के चलते हुए लोकडाउन का सर्वाधिक असर अर्थव्यवस्था पर पड़ने बाला हे उद्द्योग धंधे बंद होने से लाखो लोग बेरोजगार होने जा रहे है तमाम व्यापर ,उद्योग तबाही की कगार पर है सरकार द्वारा लॉकडाउन के दौरान गरीबो को सहायता देने की योजना तो बनाई किन्तु देश के मध्यम वर्ग और निम्न मध्यम वर्ग को नजरअंदाज कर दिया गया सामाजिक बदनामी और मर्यादाओ के चलते यह वर्ग सार्वजनिक रूप से मदद की गुहार भी लगा पा रहा है
उधर व्यापार अर्थव्यवस्था पहले ही खस्ताहाल है बंद होते व्यापारों का सर्वाधिक असर भी माध्यम वर्ग पर पड़ने बाला है क्योकि सर्वाधिक नौकरी भी इसी वर्ग की छीनने वाली है सूरी तरफ छोटे व् मझोले दुकानदार व फुटकर बिक्रेता पहले ही ईकॉमर्स कम्पनियो की भेंट चढ़ चुके है यदि देश व् राज्यों ने यु ही मध्यम वर्ग की उपेक्षा की तो आने बाले समय में अत्यंत भयावह स्तिथि देखने को मिलेगी
अंतरार्ष्ट्रीय मुद्रा कोष की रिपोर्ट के अनुसार कोरोना के दौरान सर्वाधिक आर्थिक क्षति दक्षिण एशिया में ही होगी यहां लाखो लोगो के बेरोजगार होने की आशंका है यदि इस स्तिथि का सामना करना पड़ा तो यह कल्पना करना भी भयावह की देश में बेरोजगारी की क्या स्तिथि है आज देश में 45 वर्षो के इतिहास में सर्वाधिक बेरोजगारी है यदि समय रहते इस पर ध्यान नहीं दिया गया तो देश में भुखमरी के हालत पैदा हो जायेंगे
लॉकडाउन के बाद से देश की अर्थव्यवस्था के अलावा राज्यों की अर्थव्यवस्था को भी काफी नुकसान पहुंचा है।
देश में आर्थिक वृद्धि को लेकर लंबे समय से चिंता प्रकट की जा रही है. सरकार ने भी इससे निकलने के लिए बीच-बीच में आर्थिक सुधार की घोषणाएं करके लोगों में उम्मीद बनाए रखने की कोशिश की लेकिन, फिर भी हालात में ख़ास सुधार नहीं हुआ है.
ऐसे में नौकरियों मे कटौती, बढ़ती महंगाई और देश की आर्थिक वृद्धि दर में कमी इन तीनों मोर्चों पर निराशा मिलने का लोगों की आर्थिक स्थिति पर क्या असर होगा. आने वाले साल में उनके लिए इसके क्या मायने हैं यह आने वाला वक्त ही बताएगा !
( लेखक स्वतंत्र टिप्पणीकार है )

0 टिप्पणियाँ