छग, गुजरात का होगा अध्ययन
पचमढ़ी में पिछले साल मंत्रिमंडल की चिंतन बैठक में मुख्यमंत्री चौहान ने पहली बार इस मुद्दे पर चर्चा कर प्रोजेक्ट की खूबियां गिनाई थीं। लेकिन इसके बाद मामला आगे नहीं बढ़ा। अब एकाएक मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को पूरी योजना बनाकर लाने को कहा है। इसके लिए छत्तीसगढ़ में गोबर-गो-मूत्र खरीदी के साथ ही गुजरात सहित अन्य राज्यों में गौ-संरक्षण के नवाचारों का अध्ययन भी किया जाएगा। शहरों और ग्रामीण अंचलों में गोबर-गो-मूत्र खरीदी केंद्र आदि के बारे में विस्तृत प्रोजेक्ट बनाने के निर्देश दिए गए हैं। सरकार का मानना है कि इस योजना से गौ-संरक्षण, गौ-पालकों की आमदनी बढ़ोतरी के साथ गौ-शालाओं को आत्मनिर्भर बनाने में मदद मिलेगी। मध्यप्रदेश में अभी भोपाल, इंदौर, जबलपुर, सागर सहित कई शहरों में व्यवसायिक स्तर पर गौ-काष्ठ निर्माण में गोबर का उपयोग हो रहा है। राजधानी सहित प्रदेश के कई शहरों में अंतिम संस्कार में गौ-काष्ठ का उपयोग बढ़ गया है।
आचार्य विद्यासागरजी ने शुरू कराए प्रयोग
सागर जिले के देवरीकलां के पास जैन संत आचार्य विद्यासागर जी ने शांतिधारा में गो-मूत्र और गोबर के उपयोग से कई सफल प्रयोगों पर काम शुरू कराया है। यहां ईंधन गैस से लेकर मोटर पंप और रोशनी के लिए जेनरेटर भी संचालित हो रहे हैं। कृषि विभाग के कई बड़े अधिकारी शांतिधारा का यह प्रोजेक्ट देखकर तारीफ भी कर चुके हैं। इससे बिजली और ईंधन की बचत भी होने लगी है।

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