जिले के किसानों में प्राकृतिक कृषि के प्रति जागरुकता पैदा करने और प्राकृतिक खेती को अपनाने के लिए कृषि विज्ञान केंद्र किसानों के बीच जाकर प्राकृतिक खेती जागरुकता कार्यक्रम चला रहा है। इसी क्रम में आज लहार विकासखण्ड के ग्राम वेसपुरा में प्राकृतिक खेती जागरुकता प्रशिक्षण एवं प्रदर्शन का आयोजन किया गया। जिसमें केंद्र के वैज्ञानिकों द्वारा किसानों को जीवामृत बना कर भी दिखाया गया।
इस अवसर पर प्रगतिशील कृषक रामेंद्र सिंह राजावत की अध्यक्षता में आयोजित कार्यक्रम में केंद्र के प्रधान वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ एस पी सिंह, वरिष्ठ वैज्ञानिक क्रमशः डॉ अवधेश सिंह एवं डॉ करन वीर सिंह द्वारा किसानों के बीच जाकर विस्तार से प्राकृतिक खेती की बारीकियां समझाई गईं। प्रशिक्षण के दौरान कृषि विज्ञान केंद्र द्वारा गांव में स्थापित प्राकृतिक खेती इकाई के माध्यम से मोके पर ही जीवामृत बनाकर दिखाया गया।
केंद्र प्रमुख डॉ एस पी सिंह ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि प्राकृतिक खेती में बहुत कम लागत आती है। कोई भी किसान देशी गाय का गोमूत्र, गोबर, बेसन और गुड़ लेकर जीवामृत बना सकता है। एक एकड़ खेत के लिए एक 200 लीटर के ड्रम में बना जीवामृत पर्याप्त रहता है। जिसे स्प्रे अथवा सिंचाई के पानी के साथ आसानी से प्रयोग किया जा सकता है। जीवामृत खेत में रासायनिक उर्वरकों जैसे कि यूरिया, डीएपी, एनपीके आदि का कार्य करते हुए पौधों के विकास और पैदावार में महत्वपूर्ण योगदान देता है। जीवामृत को लगातार लगाते रहने से अलग से उर्वरक लगाने की आवश्यकता नहीं पड़ती है।
वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ अवधेश सिंह ने बताया कि एक 200 लीटर के ड्रम में जीवामृत बनाने में मुश्किल से 200 रूपये का खर्च आता है। जबकि एक एकड़ में यदि डीएपी, यूरिया आदि का खर्चा जोड़ा जाए तो यह दो हजार के ज्यादा बैठता है। इस हिसाब से प्राकृतिक कृषि सस्ती और स्वास्थ्य के लिए बहुत ही बेहतर है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए श्री रामेन्द्र सिंह राजावत ने किसानों से अपील की वह कम लागत प्राकृतिक कृषि को अपनाकर खेती से अपनी आमदनी बढ़ा सकते हैं। बल्कि इतना ही नहीं वह प्राकृतिक कृषि से पैदा किए कृषि उत्पाद प्रयोग में लाकर कैंसर जैसे रोगों से भी बच सकते हैं। कार्यक्रम में प्रमुख रुप से रामसरन नगायच, मेघ सिंह, रवीकांत शर्मा, राम लखन, वीर सिंह, राम बिहारी आदि किसानों के अलावा गांव के चार दर्जन से अधिक किसानों ने भाग लेकर प्राकृतिक खेती के बारे में जानकारी हासिल की।

0 टिप्पणियाँ