सनातन संस्कृति उदय अभियान संस्था ने किया पत्रकारों एवं वरिष्ठ नागरिकों का सम्मान*






*सनातन संस्कृति धर्म के सिद्धांत पर इशारा करती है-वीरेंद्र शर्मा (अतबेई)*


उत्तरप्रदेश
               झांसी जिले के चिरगांव विकासखंड के समीप ग्राम लेवा और अतपेई के मध्य खेड़ापति हनुमान मंदिर महाराज का कुआ पर आयोजित श्रीमद्भागवत के समापन पर सनातन संस्कृति उदय अभियान संस्था ने पत्रकारों एवं वरिष्ठ नागरिकों का सम्मान किया इस दौरान सनातन संस्कृति उदय अभियान संस्था के अध्यक्ष वीरेंद्र शर्मा ने कहा सनातन धर्म की रक्षा एवं खोती जा रही सभ्यता को बापिस लाने में प्रत्येक व्यक्ति का प्रथम कर्तव्य है उस कर्तव्य को निभाना हमारा धर्म है हम अपने धर्म के लिए हमेशा तैयार है उन्होंने कहा सनातन का अर्थ है जो शाश्वत हो सदा के लिए सत्य हो जिन बातों का शाश्वत महत्व हो वही सनातन कही गई है जैसे सत्य सनातन है ईश्वर ही सत्य है,आत्मा ही सत्य है, मोक्ष ही सत्य है और इस सत्य के मार्ग को बताने वाला धर्म ही सनातन धर्म भी सत्य है वह सत्य जो अनादि काल से चला आ रहा है और जिसका कभी भी अंत नहीं होगा वह ही सनातन या शाश्वत है जिनका न प्रारंभ है और जिनका न अंत है उस सत्य को ही सनातन कहते हैं यही सनातन धर्म का सत्य है उन्होंने अंत मे कहा सनातन संस्कृति उदय संस्था बनाने का उद्देश्य समाज सेवा करना है जब तक इस शरीर मे प्राण है तब तक समाज सेवा करता रहूंगा,वही कार्यक्रम में अहमभूमिका निभाने बाले देवेंद्र त्रिपाठी ने कहा सनातन संस्कृति उदय अभियान संस्था को धर्म से जोड़ने का कार्य भी करेगे जो लोग उस परम तत्व परब्रह्म परमेश्वर को नहीं मानते हैं वे असत्य में गिरते हैं असत्य से मृत्युकाल में अनंत अंधकार में पड़ते हैं उनके जीवन की गाथा भ्रम और भटकाव की ही गाथा सिद्ध होती है वे कभी अमृत्व को प्राप्त नहीं होते मृत्यु आए इससे पहले ही सनातन धर्म के सत्य मार्ग पर आ जाने में ही भलाई है अन्यथा अनंत योनियों में भटकने के बाद प्रलयकाल के अंधकार में पड़े रहना पड़ता है सत्य दो धातुओं से मिलकर बना है सत् और तत् सत का अर्थ यह और तत का अर्थ वह दोनों ही सत्य है अहं ब्रह्मास्मी और तत्वमसि अर्थात मैं ही ब्रह्म हूँ और तुम ही ब्रह्म हो यह संपूर्ण जगत ब्रह्ममय है। ब्रह्म पूर्ण है। यह जगत् भी पूर्ण है। पूर्ण जगत् की उत्पत्ति पूर्ण ब्रह्म से हुई है पूर्ण ब्रह्म से पूर्ण जगत् की उत्पत्ति होने पर भी ब्रह्म की पूर्णता में कोई न्यूनता नहीं आती। वह शेष रूप में भी पूर्ण ही रहता है यही सनातन सत्य है जो तत्व सदा, सर्वदा, निर्लेप, निरंजन, निर्विकार और सदैव स्वरूप में स्थित रहता है उसे सनातन या शाश्वत सत्य कहते हैं वेदों का ब्रह्म और गीता का स्थितप्रज्ञ ही शाश्वत सत्य है जड़, प्राण, मन, आत्मा और ब्रह्म शाश्वत सत्य की श्रेणी में आते हैं। सृष्टि व ईश्वर (ब्रह्म) अनादि, अनंत,सनातन और सर्वविभु हैं वही पर मौजूद कथा व्यास पं.विनोद शास्त्री(वृदावन धाम)ऐबरा ने कहा हिंदू धर्म का मूल मंत्र सर्वधर्म समन्वय की रक्षा करना है समस्त धर्म का लक्ष्य शांति,अंहिसा,मानवता और आपसी भाईचारा है किसी भी धर्म में हिंसा प्रदर्शन या आचरण का उल्लेख नहीं है अपने अपने धर्म के विधि विधान के अनुसार धर्म पालन करने और दूसरे धर्म को सम्मान देना उचित है,इस दौरान धर्म मंच पर ब्रजेन्द्र सिंह राजपूत(ब्लॉक प्रमुख्य),आशीष यादव(प्रधान),धर्मेंद्र सिंह राजपूत(प्रधान),राघवेन्द्र सिंह(प्रधान),मुकेश सिंह राजपूत(प्रधान),मुकेश सिंह (प्रधान)पत्रकार ओमप्रकाश उदैनिया(मण्डल अध्यक्ष पत्रकार एकता संघ झांसी),पत्रकार पंकज रावत,विवेक तिवारी,रिंकू महाराज,दयासागर विश्वकर्मा,अनुराग तिवारी,मध्यप्रदेश से पत्रकार महेंद्र त्रिपाठी(मोंटू),पत्रकार सुधांशु मुदगिल(श्रम जीवी पत्रकार संघ भिण्ड),सनातन संस्कृति उदय संस्था अध्यक्ष बीरेंद्र शर्मा,उपाध्यक्ष महेश शर्मा,कोषाध्यक्ष देबेन्द्र त्रिपाठी,आदि मुख्य रूप से मौजूद रहे...!

*✍️पत्रकार महेंद्र त्रिपाठी"(मोन्टू) रावतपुरा"*

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