📝 *देवानंद नायक* @ 9713989417
हाल में ही बीते हुए कई घण्टो में एक तस्वीर सोशल मीडिया पर छाई है जिसमे भारत सरकार के नए नवेले मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया अपनी समर्थक वरिष्ठ नेत्री व पूर्व मंत्री इमरती देवी को गले लगा कर संबल दे रहे है तस्वीर दो बजह से चर्चित है एक सिंधिया समर्थक अपने नेता की उदारता व सहृदयता का प्रसारित करने के लिये इसका उपयोग कर रहे हैं वहीं दूसरी तरफ इस तस्वीर को हल्के तंज के साथ प्रस्तुत कर ट्रोल किया जा रहा है
यहाँ में स्पष्ट कर देना चाहता हूँ कि में सिंधिया या इमरती देवी की कार्यशैली और विचारों से इत्तेफाक नही रखता हूं सहमति ,असहमति अपनी जगह है ट्रोल राक्षसों की फौज इधर भी है और उधर भी पिछले कुछ वर्षों में सियासी लाभ के लिये पैदा की गई यह अमानवीय व्यवहार करने वाली ट्रोल राक्षसी फौज संवेदनाओं और रिश्तों की गहराइयों को क्या समझे इनको वह समझते हैं जिन्हें रिश्ते निभाना आता है तस्वीरों के वाहने कभी नेहरू कभी गांधी पर टिप्पणी करने वालों के निशाने पर आज एक महिला है अपने नेता या यूं कहें पारिवारिक मुखिया की खुशी में शामिल होने वाले एक सदस्य के रूप में यदि इमरती देवी भावुक हो गईं और उनके नेता ने यदि गले लगा कर संबल दिया तो इसमे गलत क्या है ? किसी को इसमें कुछ गलत दिखता है तो फिर साहब दोष आपकी नजर में नही नजरिये में है
इमरती देवी को जिस साधारण पृष्ठभूमि से उठाकर राजनीतिक क्षितिज पर स्थापित करने में सिंधिया परिवार ने अहम भूमिका निभाई है और वह इसके प्रति अपनी कृतज्ञता प्रकट करने में कभी हिचक नहीं करती है तो इसमें कुछ गलत नही है यहां स्पष्ट कर दूं लेखक इमरती या सिंधिया का कोई प्रवक्ता नही है और न ही इमरती देवी या सिंधिया की दलबदल राजनीति से सहमत हैं किंतु इमरती देवी की सरलता और साफगोई और पूजने की हद तक सिंधिया के प्रति समर्पण जगजाहिर है यदि ऐसेमे किसी का भावुक होकर रोना और बदले में नेता का संबल प्रदान करना कतई उपहास ,तंज या चटकारे का विषय नही है तस्वीर में सिर्फ चित्र नजर आते हैं भावनाओं और संवेदनाओ का चित्रण नही इसलिये मन की आंखों से देखिये प्रेम स्नेह और पूजने की हद तक कृतज्ञता और समर्पण नजर आएगा और रिश्ते भी वहीं निभा सकता है जो रिश्तों का ताना बाना बेहतर समझता हो
इसलिये महज तस्वीरों को देख कर उपहास या तंज मत कसिये खासकर तब जब मामला महिलाओं से जुड़ा हो क्योंकि हमेशा तस्वीरों में भाव प्रकट नही होता है उन्हें मन से और नजरिये से ही देखना होता है
अंत मे चन्द पंक्तियाँ पेशे खिदमत है "देखा नही है दिल मेरा ,समुंदर सा दरिया है ,देख मेरे आंसू औ बता क्या तेरा नजरिया है"
(लेखक पत्रकार व स्तम्भकार है)

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