भ्रष्टाचार : *नियम विरुद्ध कर दी करीब 30 कर्मचारियों की नियुक्ति







*नगर परिषद का बड़ा कारनामा*

मुरैना- कैलारस। नगर परिषद कैलारस में स्वीकृत पद नहीं होने एवं स्थापना व्यय 70 प्रतिशत से अधिक भार के साथ करीब 30पद पर नियम विरुद्ध कर्मचारियों की भर्ती करने का मामला प्रकाश में आया है। जहां एक ओर निकाय के सामने अपने ही कर्मचारियों के वेतन के लाले पड़ रहे हैं, वहीं दूसरी ओर निकाय परिषद ने अपने चहेतों को उपकृत करने के चक्कर में नियमों को तांक पर रखकर फर्जी तरीके से कर्मचारियों की नियुक्ति कर दी।

सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार नगर परिषद में कर्मचारियों की नियुक्ति स्वीकृत पद नहीं होने पर भी नियम विरूद्ध की गई है। ना ही इनकी नियुक्ति नगर पालिका अधिनियम 1961 की धारा 94 (एक) के तहत परिषद /प्रेसिडेंट इन कौंसिल की बैठक के ठहराव प्रस्ताव से की गई है। निकाय ने नियुक्ति से पूर्व शासन से भी किसी प्रकार की अनुमति नहीं ली। चूंकि नगर पालिका अधिनियम की धारा 94 (छह) के तहत दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों को नियुक्त करने की शक्ति परिषद को होती है, ऐसे में नगर परिषद में चुनाव ना होने के कारण परिषद नहीं है प्रशासक नियुक्त जिसके चलते नियुक्तियां नहीं की जा सकती परंतु इन दोनों का पालन न करते हुए नगर परिषद में कर्मचारियों की नियुक्ति की गई है। यहां बता दें कि मुख्य नगर परिषद अधिकारी संतोष सिहारे ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए नगर परिषद कैलारस में करीब ढाई दर्जन कर्मचारियों की नियुक्तियां कर डाली जिससे नगर परिषद स्थापना व्यय पर  अतिरिक्त भार बढ़ा हे !

  यहां बता दें कि स्वीकृत पद नहीं होने से इन कर्मचारियों के वेतन की राशी चुंगी क्षतिपूर्ति राशि से प्राप्त नहीं होती है। इससे नगर परिषद पर हर माह 1.50-2.75 लाख रुपये अतिरिक्त वित्तीय भार बढ़ जाता है। 
  जिसके चलते पूर्व से कार्य कर रहे कर्मचारियों को वेतन भी समय पर नहीं मिल पा रहा है इतना ही नहीं नगर में विकास कार्यों पर भी ठहराब सा आया है  और तो और सूत्रों से यह भी जानकारी प्राप्त हुई है के नगर परिषद पर बिजली का बिल भी बकाया है इतना बड़ा कारनामा सीएमओ सिहारे  ने  अपने कार्यकाल में कर डाला  जानकारी तो यह भी प्राप्त हुई है के इन नियुक्तियों के एवज में एक मोटी रकम वसूली भी गई है जिन सब की जानकारी नगर परिषद के प्रशासक नगर के तहसीलदार भरत कुमार  के संज्ञान में नहीं है  जो बड़ा  ही  विचारणीय प्रश्न है अब देखना यह है कि प्रशासन इन नियम विरुद्ध की गई नियुक्तियों को समाप्त करता है या फिर नियुक्तियां यथावत जारी रहती है।

 इनका कहना है

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