बाबा साहब की विद्वता की छाप हर समाज पर पड़ी : मुदगल

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भिण्ड।। स्वतंत्र भारत की राजनीति व समाज को जिन दो व्यक्तियों ने सर्वाधिक प्रभावित किया है वे हैं पहले गांधी जी व दूजे भीमराव रामजी अंबेडकर यानि बाबासाहेब। इनमें से बाबासाहेब की भारतीय राजनीति में बाबासाहेब की कांग्रेस द्वारा घोर उपेक्षा के बाद भी उनकी स्थापना का इतिहास पढ़ना हो तो एक और व्यक्ति का उल्लेख आवश्यक हो जाता है। वह व्यक्ति है दलित नेता जोगेंद्रनाथ मंडल। कांग्रेस की घनघोर और अटाटूट उपेक्षा के शिकार जोगेंद्रनाथ मंडल ने यदि स्वतंत्रता पूर्व की भारतीय राजनीति में बाबासाहेब को सफलतापूर्वक स्थापित न किया होता तो आज भारत में दलित चिंतन का स्वरूप आमूलचूल भिन्न होता। इसके आगे आज यदि हम नागरिकता संशोधन कानून के सामाजिक मंथन का अध्ययन, मनन करें तो दो व्यक्तित्वों का स्मरण आवश्यक हो जाता है पहले जोगेंद्रनाथ मंडल और दूजे बाबासाहेब। इन दोनों महानुभावों ने नागरिकता संशोधन कानून व पाकिस्तान में बसे अल्पसंख्यक हिंदुओं को भारतीय नागरिकता देने के कानून के महत्व व आवश्यकता को दशकों पूर्व पहचान लिया था। उपरोक्त उदगार भाजपा नेता अर्पित मुदगल ने अनुसूचित वर्ग समाज के बीच ग्राम पंचायत भवन भजपुरा में कही।

उन्होंने कहा कि बाबा साहब की विदुता की छाप हर समाज पर छोड़ी। वे प्रारंभ से ही दलित चिंतन को उपेक्षा की दृष्टि से देखने वाली कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति ने स्वभावतः ही प्रारंभ में दलित नेता जोगेंद्रनाथ मंडल व बाबा साहेब अंबेडकर की घोर उपेक्षा की थी। कांग्रेस ने जब बाबासाहेब के प्रति बेहद अपमानजनक रवैया अपनाते हुये संविधान सभा में भेजे गए प्रारंभिक 296 सदस्यों में अंबेडकर को जगह नहीं दी थी तब जोगेंद्रनाथ मंडल ने अंबेडकर जी को संविधान सभा में सम्मिलित करने की भूमिका बनाई थी। जब कांग्रेस ने संविधान सभा में अंबेडकर जी को जाने से रोकने के लिये तमाम प्रकार के प्रपंच करना प्रारंभ किये तब मंडल ने बंगाल के खुलना-जैसोर से अपनी सीट खाली करके बाबा साहब को चुनाव जितवाकर संविधान सभा के लिए निर्वाचित कराया था और समूची कांग्रेस को चौंकाते छकाते हुये भारतीय राजनीति में एक नया अध्याय प्रारंभ किया था। विभाजन के विषय में यह तय हुआ था कि जिन क्षेत्रों में हिंदू जनसंख्या 51% से अधिक है वे क्षेत्र भारत में सम्मिलित किये जायेंगे। इसके बाद भी कांग्रेस ने तब हद दर्जे की गलती करते हुये बाबा साहेब को संविधान सभा में अप्रासंगिक करने हेतु बंगाल के खुलना-जैसोर को 71% हिंदू बहुल वाला क्षेत्र होने के बाद भी पाकिस्तान को सौंप दिया और तब बाबासाहेब तकनीकी तौर पर पाकिस्तानी  संविधान सभा के सदस्य माने गये थे।



बाबासाहेब ने इसका विरोध किया, जिसके बाद ब्रिटिश प्रधानमंत्री के हस्तक्षेप से बाबासाहेब बंबई राज्य से एमएस जयकर द्वारा खाली की गई सीट से चुनकर भारतीय संविधान सभा में पहुंच पाये थे। बाबासाहेब प्रारंभ से ही अखंड भारत के पक्ष में थे। उन्होंने बंटवारे के लिए तैयार महात्मा गांधी और जवाहरलाल नेहरू के साथ जिन्ना का भी पुरजोर विरोध किया। उनकी पुस्तक “थॉट्स ऑन पाकिस्तान” में इसका पूरा विवरण है, जिसमें उन्होंने लिखा है कि मुस्लिम तुष्टिकरण की नीति के चलते कांग्रेस ने देश का बंटवारा कर डाला। बाबासाहेब का यह स्पष्ट मानना था कि जब धार्मिक आधार पर बंटवारा हो चुका है, तब पाकिस्तान में रहने वाले हिंदुओं को भारत आ जाना चाहिए। उन्होंने यह यह भी आशंका जताई थी कि धर्म के आधार पर देश के बंटवारे से हिंदुओं को गंभीर क्षति पहुंचेगी और ऐसा हुआ भी। जोगेंद्रनाथ मंडल ने तब पाकिस्तानी सरकार से अपने त्यागपत्र में विस्तृत तौर पर लिखा था कि मंत्री रहते हुए भी वे पाकिस्तान में दलितों को मुस्लिमों के अत्याचार से नहीं बचा पाए। बंटवारे के बाद पाकिस्तान में बचे ज्यादातर दलित या तो मार दिए गए या फिर मजबूरी में उन्होंने धर्म परिवर्तन कर लिया। अपनी ही हुकूमत में वह चीखते-चिल्लाते रहे, लेकिन पाकिस्तान सरकार न तो दलित हिंदुओं की मदद के लिए आई, न ही अन्य अल्पसंख्यक हिंदुओं की सुरक्षा हेतु उसने कोई कदम उठाया। इस प्रकार देश में प्रथम मुस्लिम-दलित राजनीति का प्रयोग हुआ जो कि बेहद असफल व निराशाजनक रहा किंतु यह प्रयोग अब भी यदा कदा यहां-वहां प्रयुक्त होता रहता है। अपने ही हाथों बनाई गई इस्लामिक सरकार में मंडल ने जब पाकिस्तान के मुसलमानों के हाथों निशाना बनाकर दलितों की निर्ममतापूर्वक हत्याएं, बलात् धर्म-परिवर्तन और दलित बहन-बेटियों की आबरू लुटते देखी, तो वह सब कुछ छोड़कर भारत वापस लौट आए और गुमनामी के अंधेरे में ही उनकी मौत हो गई। अपने अंतिम क्षणों में वह इस प्रयोग पर पछताते रहे, पाकिस्तान जाने का दुख उन्हें सालता रहा। पाकिस्तान के बहुसंख्यक मुस्लिमों के हाथों लाखों दलितों के नरसंहार का पश्चाताप उन्हें कचोटता रहा। पश्चाताप इसलिए, क्योंकि इनमें से बहुत से दलित परिवार उन्हीं की अपील पर पाकिस्तान का हिस्सा बनने को तैयार हुए थे।



इस कार्यक्रम का संचालन हिंदूवादी नेता रमेश बंसल ने किया आभार दशरथ जाटव ने किया। इस दौरान ग्रामवासी ने रोचकता पूर्ण तरीके से गांव की हर गली गली पताके की लड़ियां लगवाई द्वार द्वार पर रंगोली भी बनी तथा सायं काल मिष्ठान व भोजन भी कराया।

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