✍️ देवानंद नायक
*कहाँ तो तय था चराग़ाँ हर एक घर के लिए कहाँ चराग़ मयस्सर नहीं शहर के लिए*
दुष्यंत कुमार की यह पंक्तियां आज के परिपेक्ष्य में लहार क्षेत्र के विकास की परिभाषा में सटीक बैठती है
भिण्ड जिले का लहार क्षेत्र जो भाजपा कांग्रेस दोनों का गढ़ है विधानसभा चुनाव में यहाँ लगातार 1993 से कांग्रेस जीतती रही है तो लोकसभा चुनावों में 1989 से भाजपा सिरमौर बनती रही है लंबे समय से दोनों दलों के जनप्रतिनिधियों को यहां से प्रतिनिधित्व प्राप्त रहा है सूबे 1993 से आज 2023 तक बात करें तो 12 वर्ष कांग्रेस ने सूबे की सत्ता पर राज किया तो 18 वर्ष भाजपा सत्तासीन रही है (वर्तमान में भी है) लेकिन लहार विधानसभा क्षेत्र के विकास की बात करें तो नतीजे सिफर ही रहे हैं लंबे अरसे से अपनी विधायकी का जलवा कायम रखने वाले डॉक्टर साहब शायद क्षेत्रीय विकास की नब्ज टटोलना भूल गए हैं आंकड़ो की बाजीगरी और सियासी समीकरण को साधने की कला विधानसभा चुनाव में कांग्रेस या डॉ गोविंद सिंह व लोकसभा में उसके उलट भाजपा को कामयाबी दिलाती रही है लेकिन विकास की अपनी जिम्मेदारियों से बचना दोनों पक्षो ने चाहा लहार विधानसभा क्षेत्र की सीमाएं सुदूर आलमपुर तक हैं जो जिला मुख्यालय से 100 किमी की दूरी पर है आलमपुर दबोह क्षेत्र को आज तक तहसील के दर्जा प्राप्त नही हुआ क्या वहां के किसानों को तकलीफ नहीं होती है दूसरी तरफ लहार मिहोना व रौन तहसील मुख्यालय में महज 10 - 10 किमी की दूरी है न अच्छी स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध है न शिक्षा की व्यवस्था और सबसे महत्वपूर्ण रोजगार की व्यवस्था लहार क्षेत्र के प्रत्येक गांव के युवा दूर महाराष्ट्र व गुजरात मे रोजगार हेतु पलायन करते रहे है किंतु आज दिन तक इस दिशा में न विधायक की ओर से कोई पहल हुई न ही सांसद की तरफ से
विकास के नाम पर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का भवन बना है पर डॉक्टर नही है कक्ष है पर मशीन नही है नगर में पानी की टँकी बनी भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई , अब चार चार टँकी बनकर तैयार पर पानी की आपूर्ति कब होगी तय नही है , पानी बरसते ही नगर जलाशय में परिवर्तित हो जाता है जहाँ विकास डुबकी लगाते नजर आता है विकास के नाम पर बना स्टेडियम किस हाल में किसी से छिपा नहीं है आधा अधूरा निर्माण पूर्ण होने की कोई उम्मीद नहीं है केवल घोषणा और कागजी शिलान्यास के नाम पर विकास चल रहा है गौशाला है पर गाय सड़कों पर है गौचर भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गया है शौचालय निर्माण से लेकर पीएम आवास योजना तक सब जगह विकास ही विकास की गंगा वह रही है विकास की गंगा में सरोबार लहार को देखकर अभी आशंका होती है कहीं ज्यादा विकास की गंगा में डूबने कारण लहार की खुदकुशी न हो जाये

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